Panna Well Collapse Updates: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. अजयगढ़ जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा गांव में खेत पर कुएं की खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई, जिसमें कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए. इस हादसे में पांच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो लोग किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे.
बताया जा रहा है कि गांव निवासी बिन्नू अहिरवार के खेत में पिछले करीब दस दिनों से कुएं की खुदाई का काम चल रहा था. सात मजदूर लगातार खुदाई में जुटे हुए थे. मंगलवार सुबह करीब 11 बजे काम के दौरान अचानक कुएं की भीतरी मिट्टी भरभराकर गिर गई और कुछ ही सेकंड में पूरा माहौल चीख-पुकार में बदल गया.
पानी पीने बाहर आए दो मजदूर, तभी हुआ हादसा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे से ठीक पहले दो मजदूर पानी पीने के लिए ऊपर आए थे. उसी दौरान कुएं के भीतर की मिट्टी तेजी से धंस गई और अंदर काम कर रहे बाकी मजदूर मलबे में दब गए. हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला.
मलबे में दबे मजदूरों में चुन्नू यादव, राजकुमार यादव, आशीष यादव और चुनवाद पाल के नाम सामने आए हैं. रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले राजकुमार यादव का शव बाहर निकाला. इसके बाद लगातार राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया.
मध्यप्रदेश: #पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में मनरेगा से निर्माणाधीन कुएं की मिट्टी धंसने से बड़ा हादसा। ग्राम कड़रहा में कुएं के अंदर काम कर रहे 5 मजदूर दबे, अब तक 2 शव निकाले गए। बिना सुरक्षा इंतजाम मजदूरों से कराया जा रहा था जोखिमपूर्ण कार्य। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। pic.twitter.com/ccPsnvRSN2
— Rohit_chaudhary (@rohitch131298) May 26, 2026
प्रशासन और ग्रामीणों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व विभाग की टीम और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया. भारी संख्या में ग्रामीण भी राहत कार्य में जुट गए. जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया.
पन्ना जिले के जनसंपर्क अधिकारी ने भी इस हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि ग्राम पंचायत बीहरपुरवा के नयापुरवा में निर्माणाधीन कुएं की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से पांच लोगों की जान चली गई, जबकि दो मजदूर सुरक्षित बाहर निकल आए.
मिट्टी की स्थिति पर पहले से थे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह खुदाई की जा रही थी, वहां की मिट्टी काफी भुरभुरी और कमजोर थी. ऐसे इलाकों में गहरी खुदाई को पहले से ही जोखिमभरा माना जाता है. बावजूद इसके काम लगातार जारी रहा. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे और न ही किसी तकनीकी विशेषज्ञ की सलाह ली गई थी.
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुएं जैसी गहरी खुदाई के दौरान मिट्टी की मजबूती, जलस्तर और आसपास की संरचना का तकनीकी परीक्षण बेहद जरूरी होता है. यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी.
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
इस हादसे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कुएं की खुदाई किस अनुमति के आधार पर कराई जा रही थी. क्या यह निजी निर्माण था या किसी सरकारी योजना के तहत काम चल रहा था?
इसके अलावा यह भी जांच का विषय बन गया है कि क्या खुदाई से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया गया था या नहीं. यदि क्षेत्र पहले से संवेदनशील था, तो मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
जांच और जिम्मेदारी पर टिकी निगाहें
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है. हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है.
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