Bihar New Townships: बिहार सरकार की ओर से आयोजित सहयोग शिविरों में लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए बड़ी संख्या में आवेदन पहुंच रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 3 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से लगभग 2 लाख 40 हजार मामलों का निष्पादन किया जा चुका है. सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की है कि किसी भी नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े.
30 दिन की समयसीमा, देरी पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक आवेदन का निपटारा अधिकतम 30 दिनों के भीतर किया जाए. यदि कोई अधिकारी तय समयसीमा में आवेदन का समाधान करने में विफल रहता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार की नई व्यवस्था के तहत 31वें दिन संबंधित अधिकारी के निलंबन का आदेश जारी किया जा सकता है. इसका उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही तय करना और जनता को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है.
नोटिस सिस्टम से होगी लगातार मॉनिटरिंग
आवेदनों के निपटारे की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने चरणबद्ध नोटिस प्रणाली लागू की है.
सरकार का कहना है कि सहयोग शिविरों का उद्देश्य लोगों की शिकायतों और मांगों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है. बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों के बीच समयबद्ध निपटारे के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है ताकि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सके.
सीएम कार्यालय रख रहा सीधी नजर
पूरी प्रक्रिया की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से की जा रही है. आवेदन प्राप्त होने से लेकर उसके अंतिम निपटारे तक हर चरण का रिकॉर्ड रखा जा रहा है. अधिकारियों को समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे लंबित मामलों की संख्या कम हो और नागरिकों को राहत मिल सके.
प्रशासनिक जवाबदेही का नया मॉडल
सरकार की इस पहल को प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सख्त समयसीमा और नोटिस व्यवस्था के जरिए यह संदेश दिया गया है कि जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और लापरवाही की स्थिति में कार्रवाई तय है.
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