Canada New Immigration Policy: कनाडा अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी में दशकों बाद सबसे बड़ा बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव विदेशी छात्रों और अस्थायी प्रवासियों के लिए एक कठोर कदम साबित हो सकता है, लेकिन साथ ही वैश्विक टैलेंट और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए नए अवसर भी लेकर आ रहा है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की नई सरकार ने साफ कर दिया है कि अब लक्ष्य केवल संख्या नहीं, बल्कि क्वालिटी बेस्ड इमिग्रेशन होगा.
सरकार ने अपने पहले बजट में अंतरराष्ट्रीय टैलेंट को आकर्षित करने के लिए 1.2 बिलियन डॉलर (लगभग 106 करोड़ रुपये) का प्रावधान किया है. इस फंड के जरिए 1,000 से अधिक उच्च कौशल वाले शोधकर्ताओं और पेशेवरों को कनाडा लाने का लक्ष्य है. सरकार का मानना है कि ये विशेषज्ञ कनाडा की भविष्य की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई दिशा देंगे.
H-1B वीजा धारकों के लिए स्पेशल एंट्री रूट
कनाडा अमेरिका के H-1B वीजा धारकों के लिए तेज एंट्री प्रक्रिया (Fast-Track Entry) शुरू करने जा रहा है. यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा शुल्क को बढ़ाकर 100,000 डॉलर कर दिया है. इससे अमेरिका में काम कर रहे हजारों उच्च-कौशल वाले प्रवासियों में असमंजस की स्थिति है, और यही मौका कनाडा भुनाना चाहता है.
इमिग्रेशन पर नियंत्रण: जनसंख्या वृद्धि पर लगाम
तेजी से बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए कनाडा सरकार अब प्रवासियों की संख्या पर सख्त नियंत्रण लगाने की दिशा में है. 2026–2028 तक हर साल लगभग 3.8 लाख स्थायी निवासी (Permanent Residents) को ही मंजूरी मिलेगी.
वहीं, अस्थायी निवासियों (Temporary Residents) की संख्या में 40% की कटौती की जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक देश में गैर-स्थायी निवासियों की हिस्सेदारी 7.3% से घटाकर 5% से नीचे लाई जाए.
विदेशी छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ीं
विदेशी छात्रों पर असर सबसे बड़ा पड़ने वाला है. सरकार ने स्टडी परमिट की संख्या में भारी कटौती की घोषणा की है:
यह संख्या जस्टिन ट्रूडो की योजना से लगभग आधी है, जिन्होंने सालाना 3,05,900 परमिट का अनुमान लगाया था. इस कटौती का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि वे कनाडा में विदेशी छात्रों का सबसे बड़ा समूह हैं.
विश्वविद्यालयों की चिंता और चेतावनी
यूनिवर्सिटीज़ कनाडा ने सरकार की नई नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे “स्थायी और संतुलित” इमिग्रेशन सिस्टम के विचार का समर्थन करते हैं, लेकिन चेतावनी दी कि यह नीति देश की प्रतिभा-आधारित अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकती है.
क्या होंगे आर्थिक प्रभाव?
डेजार्डिन्स फाइनेंशियल ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, कम प्रवासियों के आने से श्रमबल (वर्कफोर्स) में कमी होगी, जिससे कंपनियों को वेतन बढ़ाना पड़ सकता है. जनसंख्या वृद्धि धीमी होने से किराए में राहत मिल सकती है, क्योंकि विदेशी छात्र और अस्थायी कामगार ही अधिकतर किराएदार होते हैं. वहीं, सीमित जनसंख्या वृद्धि से देश का प्रति व्यक्ति GDP सुधार सकता है.
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