'मौत का सफर' क्यों बन रहीं स्लीपर बसें? सामने आई खतरनाक सच्चाई, जानकर रह जाएंगे हैरान

दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को भी एयर इंडिया सेट्स की बस में आग लगी थी. विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं में दोषी बसों का फाल्टी डिजाइन, अधिक लोड, छतों पर सामान रखना और ड्राइवरों की अपर्याप्त ट्रेनिंग जैसी कई बड़ी वजहें हैं.

Buses Catch Fire Rule Violations Turn Sleeper Buses into Death Traps Causes and Solutions
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नई दिल्ली: जयपुर के पास मनोहरपुर इलाके में हाल ही में एक डबल डेकर स्लीपर बस में भीषण आग लग गई. हादसे की वजह बनी बस की छत पर नियमों के खिलाफ रखी बाइक, गैस सिलिंडर और अन्य सामान, जो ऊपर से गुजरती हाईटेंशन लाइन से टकरा गया. इस दुर्घटना में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई. दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को भी एयर इंडिया सेट्स की बस में आग लगी थी. विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं में दोषी बसों का फाल्टी डिजाइन, अधिक लोड, छतों पर सामान रखना और ड्राइवरों की अपर्याप्त ट्रेनिंग जैसी कई बड़ी वजहें हैं.

बसों में आग लगने के मुख्य कारण

दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर और रोड सेफ्टी विशेषज्ञ अनिल छिकारा का कहना है कि बसों में आग लगने के प्रमुख कारण हैं: अधिक लोड, शॉर्ट सर्किट, लोकल स्तर पर कम गुणवत्ता वाले मटीरियल का इस्तेमाल, और बसों तथा एसी की खराब मेंटेनेंस. इसके अलावा, इमरजेंसी गेट की अनुपस्थिति और छत पर सामान लोड करना भी दुर्घटनाओं को आम बनाता है.

डिजाइन और निर्माण में लापरवाही

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. विक्रम सिंह के अनुसार, बसों के डिजाइन में नियमों की अनदेखी की जा रही है. बसों में ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल, ड्राइवरों की अपर्याप्त ट्रेनिंग और शराब पीकर ड्राइविंग जैसी बातें भी हादसों में योगदान देती हैं. इसके अलावा, बसों की छतों पर अधिक वजन का माल भरना आम प्रैक्टिस बन गया है, जो आग लगने की स्थिति में जानलेवा साबित होता है.

इमरजेंसी गेट की कमी

रिटायर्ड मोटर लाइसेंसिंग ऑफिसर नंद गोपाल का कहना है कि अक्सर बसों में इमरजेंसी एग्जिट गेटों को हटा दिया जाता है या सीटें लगा दी जाती हैं. इस वजह से आग लगने पर यात्रियों के बचने का कोई रास्ता नहीं बचता. ऑटोमेटिक सिस्टम भी आग की स्थिति में काम करना बंद कर देते हैं.

ओवरलोडिंग और सामान ढोना

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि बसों में यात्रियों के साथ भारी मात्रा में माल ढोना एक गंभीर समस्या है. ट्रकों की तरह बसों की भी नियमित जांच होनी चाहिए, खासकर ज्वलनशील वस्तुओं के लिए.

BS-6 बसों में बढ़ते हादसे

दिल्ली इंटरस्टेट बस ऑपरेटर्स संघ के जनरल सेक्रेटरी श्यामलाल गोला के अनुसार, हाल में आग लगी अधिकांश बसें BS-6 हैं. इनमें शॉर्ट सर्किट की समस्या अधिक देखने को मिल रही है.

समाधान और सुरक्षा उपाय

विशेषज्ञों का सुझाव है कि यात्री बसों में सामान ढोने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए, नियम तोड़ने वाले बस मालिकों पर कड़ा एक्शन हो, बसों की नियमित मेंटेनेंस हो और हर बस में दो इमरजेंसी गेट अनिवार्य हों. इसके अलावा, बस ड्राइवरों की नियमित ट्रेनिंग और ज्वलनशील सामान का कम इस्तेमाल जरूरी है.

हाल की बड़ी बस दुर्घटनाएं

  • 14 अक्टूबर: जैसलमेर-जोधपुर हाईवे, 26 यात्रियों की मौत.
  • 24 अक्टूबर: आंध्र प्रदेश, 20 यात्रियों की आग में मौत.
  • 25 अक्टूबर: मध्य प्रदेश, अशोकनगर, कोई जान नहीं गई.
  • 26 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश, लखनऊ-अगरा एक्सप्रेस-वे, 70 लोग सुरक्षित.
  • 15 मई: बिहार, बेगूसराय-दिल्ली बस, 5 लोगों की मौत.

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