नई दिल्ली: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Building Bharat Leadership Summit' में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शिरकत की. इस मौके पर उन्होंने मंच से कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि भारत 24 के बिल्डिंग भारत लीडरशिप समिट रोड मैप टू विकसित भारत 2047 के अवसर पर यहां पर उपस्थित इस चैनल के कर्ताधर्ता इस चैनल के मार्गदर्शक डॉक्टर जगदीश चंद्रा जी और चैनल की पूरी टीम और आप सभी उपस्थित साथियों मुझे बहुत खुशी है कि आज रोड मैप टू विकसित भारत एक्ट 2047 की चर्चा को यहां इस यहां इस मंच पर आगे बढ़ाया जा रहा है.
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अगर मैं एक आम व्यक्ति की दृष्टि से बात करूं कि एक आम व्यक्ति विकसित भारत को कैसे परिभाषित करें? कैसे समझे? एक आम व्यक्ति के लिए विकसित भारत क्या होगा? कैसा दिखेगा? तो इन एक भारत के सामान्य नागरिक के लिए विकसित भारत यानी जब सरकार उसकी दहलीज पर हो, जब उसके जीवन में सही मायने में कोई परिवर्तन आए और जीवन में बदलाव का, जीवन में परिवर्तन का एक बहुत बड़ा माध्यम है एक्सेस टू गुड क्वालिटी हेल्थ केयर. अगर सुलभ गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा भारत के 146 करोड़ नागरिकों को सुनिश्चित है तब हम कह सकते हैं कि सही मायने में भारत को हम विकसित बना पाए हैं और यह एक नए भारत की तस्वीर है और ऐसे ही भारत का निर्माण करने का प्रयास मेरा मंत्रालय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय कर रहा है. लेकिन हमारी सरकार की एक सोच है. कोई भी लक्ष्य किसी एक मंत्रालय का लक्ष्य नहीं है. पूरी सरकार का लक्ष्य है. और इसलिए जब हम स्वस्थ भारत की बात करते हैं जो विकसित भारत का एक बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ है. तो इसके लिए बहुत सारे मंत्रालय होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच के तहत अपना-अपना योगदान दे रहे हैं.
"गरीब कल्याण की बहुत सारी योजनाएं लागू हुईं"
उन्होंने कहा कि जब हमारी सरकार बनी तो बहुत सारी गरीब कल्याण की योजनाएं एक-एक करके लागू हुई. और बड़ी संख्या में देश के वंचित समुदाय को जो सबसे गरीब है मूलभूत आवश्यकताओं के लिए जो आज भी परेशान है उसकी चिंता की गई. गरीबों के आवास बनाए गए. उनके लिए शौचालय बनाए गए. बिजली का कनेक्शन दिया गया. पीने का शुद्ध जल घर तक पहुंचाया गया. स्वच्छ ईंधन की व्यवस्था की गई. यहां तक कि आज अगर हम नेट जीरो कार्बन मिशन की बात करते हैं तो यह सारे प्रयास कहीं ना कहीं हमें बेहतर स्वास्थ्य की तरफ लेकर जाते हैं. और इसके साथ ही हमारे अपने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वस्थ भारत निर्माण के लिए सबसे पहले अपने दृष्टिकोण में बदलाव किया. यानी बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की आज हमारी परिभाषा केवल रोग का उपचार करना नहीं है बल्कि रोग की रोकथाम करना पहला कदम है और यह तय किया हमने अपनी नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में और प्रिवेंटिव केयर प्रमोटिव केयर यह पहले आता है क्यूरेटिव रिहबिलिटेटिव और पैलिएटिव बाद में आता है और कुल मिलाकर यही समग्र स्वास्थ्य की परिभाषा है. प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की दिशा में बहुत सारे हमने प्रयोग किए हैं.
अनुप्रिया पटेल ने आगे कहा कि मैं आपको कुछ उदाहरण दूं तो ईट राइट इंडिया हमारा एक ऐसा मिशन है. स्टॉप ओबेसिटी का हमारा जो अभियान है जिसके लिए स्वयं माननीय प्रधानमंत्री जी ने लाल किले के प्राचर से आह्वान किया है. हमारी कोशिश है कि देश का हर नागरिक आज अपने दैनिक आहार में तेल, चीनी और नमक इन तीनों में कटौती करें ताकि वो बेहतर स्वास्थ्य की ओर आगे बढ़े. और इसी प्रकार अगर प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की दिशा से बात करूं तो भारत में हमारा यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम जो चलाया जाता है जो इस सरकार का कार्यक्रम नहीं है. बहुत पहले का कार्यक्रम है. लेकिन फर्क यह है कि पहले जब टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता था देश के ढाई करोड़ बच्चे और देश की 2 करोड़ 90 लाख गर्भवती महिलाओं के लिए तो इस टीकाकरण कार्यक्रम में केवल पांच वैक्सीन सम्मिलित होती थी. लेकिन हमारी सरकार आने के बाद हमने इस टीकाकरण कार्यक्रम में वैक्सीन की संख्या बढ़ाई.
"प्रधानमंत्री ने बच्चियों के लिए HPV वैक्सीन का शुभारंभ किया"
उन्होंने कहा कि आज 11 वैक्सीन है जो हर साल ढाई करोड़ बच्चों और 2 करोड़ 90 लाख गर्भवती महिलाओं के लिए लगाई जा रही है उनको और हमने कुछ ही दिनों पहले इसमें एक और नई कड़ी जोड़ी है जब 28 फरवरी को प्रधानमंत्री ने इस देश की बच्चियों को एक सुरक्षित भविष्य देने के लिए एचपीवी वैक्सीन इनका शुभारंभ किया है. एचपीवी का टीका, इसको लेकर बड़े सवाल उठते थे देश की संसद में कि आखिर सरकार कब देश की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए टीका लगाएगी. अब यह शुरुआत हो गई है और 14 वर्ष की हर बच्ची इस देश में आज 1 करोड़ 20 लाख ऐसी बच्चियां हैं जो 14 वर्ष की आयु की हैं और ऐसी हर बच्ची को आज सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सिंगल डोज एचपीवी वैक्सीन पूरी तरीके से निशुल्क रूप से दिया जा रहा है और मैं यह भी कहना चाहूंगी कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है. WHO अप्रूव्ड है और भारत ही नहीं आज दुनिया के 160 देश हैं जो अपनी बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर जैसे खतरे से जो आज सेकंड मोस्ट कॉमन कैंसर है महिलाओं में उससे बचाने के लिए इस टीके को लगाने का काम कर रहा है. तो हमारा इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम एक बहुत बड़ा कदम है प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की की दिशा में जिसके कारण आज हम मातृ मृत्यु दर शिशु मृत्यु दर अंडर फाइव मोटलिटी इन सब में गिरावट ला रहे हैं और इतनी तेज गिरावट ला रहे हैं कि ये दुनिया को भी पीछे छोड़ रही है.
उन्होंने कहा कि यह कहते हुए बेहद प्रसन्नता होती है कि भारत ने तकनीक का उपयोग करके यूवीन पोर्टल का उपयोग करके जिस तत्परता के साथ इस इमुनाइजेशन प्रोग्राम को आगे चलाया है उसका परिणाम यह है कि आज अगर दुनिया में मैटरनल मोटलिटी में गिरावट 48% की दर से हो रही है तो भारत में यह गिरावट 86% की दर से हो रही है. अगर दुनिया में अंडर फाइव मोटलिटी आज 61% से नीचे आ रही है तो भारत के अंदर यह 76% की रेट से नीचे आ रही है और नियोनेटल मोटलिटी अगर दुनिया में इसकी गिरावट की दर 54% है तो भारत में इसकी गिरावट की दर 70% है तो आज हम अपने बच्चों को महिलाओं को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित रह पा रहे हैं और बहुत सारे अनमोल जीवन हम बचा पा रहे हैं अपने इस कार्यक्रम के कारण और जो हमने एक अलग दृष्टिकोण एक अलग तरीका अपनाया काम करने का उसके कारण और जब हम प्रिवेंशन की बात करते हैं तो इसमें अर्ली डायग्नोसिस का जांच का इसका बहुत बड़ा महत्व होता है. कोई भी रोग अगर समय से उसकी जांच हो जाए और उसका पता चल जाए तो हम टाइमली ट्रीटमेंट दे सकते हैं और बहुत सारी अनमोलगियों को बचा सकते हैं और इसलिए आज देश में जो एक बड़ा नेटवर्क है हमारे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का जो हमारे आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं यानी देश के किसी भी सामान्य नागरिक को अगर सबसे पहले चिकित्सा के लिए स्वास्थ्य सेवा के लिए कहीं जाना है तो सबसे पहला पॉइंट ऑफ कांटेक्ट उसके लिए एक आयुष्मान आरोग्य मंदिर है और 10000 से ज्यादा आज ये पूरा नेटवर्क है आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का जिसमें हमने देश के हर व्यक्ति की जो 30 वर्ष की आयु का है या उससे अधिक है उसकी डायबिटीज, कैंसर और थ्री टाइप्स ऑफ कॉमन कैंसर पुरुषों और महिलाओं के लिए ओरल कैंसर और महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर और सर्विक्स कैंसर की हमने जांच शुरू कर दी है. आज देश के अंदर करोड़ों लोगों की समय रहते जांच हो रही है. डायबिटीज, हाइपरटेंशन के खतरे का पता चल रहा है.
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कैंसर के खतरे का समय रहते पता चल रहा है और इस अर्ली डायग्नोसिस के कारण हम उन्हें समय रहते ट्रीटमेंट पे भी डाल पा रहे हैं. तो भारत के अंदर आज एक बहुत बड़ा अभियान चल रहा है कि कैसे हम यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की ओर बढ़े. एक-एक नागरिक को हम एक्सेसबल, अफोर्डेबल और क्वालिटी हेल्थ केयर कैसे सुनिश्चित करें? और इसलिए यह भी जरूरी हो जाता है कि आने वाले समय में हमें हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तो बढ़ाना ही है अपनी आबादी की आवश्यकताओं को देखते हुए. लेकिन इसके साथ-साथ हमें देश में डॉक्टर्स की संख्या भी बढ़ानी है. देश में स्पेशलिस्ट भी बढ़ाने हैं. और यहां तक कि एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स भी बढ़ाने हैं. नर्सिंग स्टाफ भी बढ़ाना है. और मुझे खुशी है आपके बीच में यह कहते हुए कि जब हम विकसित भारत की बात करते हैं तो उस विकसित भारत की पूरी तैयारी हमने शुरू कर दी है. 12 वर्षों में हमने देश के अंदर बड़ी संख्या में नए मेडिकल कॉलेजेस बनाए हैं. नए नर्सिंग कॉलेजेस हम बना रहे हैं. और एमबीबीएस और पीजी की सीट्स की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है. यानी आने वाले समय में आपके पास बढ़ी हुई संख्या में डॉक्टर्स भी होंगे और विशेषज्ञ डॉक्टर्स भी होंगे और नर्सिंग स्टाफ भी होगा और इसके साथ ही इस बार के बजट में एक बहुत बड़ी घोषणा की गई कि हम आने वाले समय में 5 साल के अंदर-अंदर 1 लाख की संख्या में अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स बनाकर तैयार करेंगे और जैसे ही हमारे पास अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ेगी डॉक्टर्स के ऊपर दबाव कम होने लगेगा. तो आने वाले समय में केयर गिवर्स भी होंगे, अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स भी होंगे. यानी हेल्थ केयर की जिस मैन पावर की आवश्यकता एक विकसित देश में होनी चाहिए उसकी पूर्ति भारत आज से करने के लिए तैयार हो रहा है.
उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं हमारे देश की अपनी जो बहुत ही यूनिक चुनौतियां हैं. हमारी आबादी बहुत बड़ी है. हमारे अभी भी बहुत सारे अगर हम भारत की ज्योग्राफी पर दृष्टि डालें तो बहुत सारे ऐसे दूरदराज के इलाके हैं जो अभी भी इनसेक्सेसिबल हैं. जहां अभी भी पहुंचना बहुत कठिन है और जहां रहने वाले व्यक्ति के लिए एक उत्कृष्ट किसी टर्शरी हेल्थ केयर फैसिलिटी में जाकर किसी डॉक्टर को कंसल्ट करना यह एक सपने जैसा है और ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए हमने बड़े पैमाने पर हमारे देश की स्वास्थ्य सेवा में टेक्नोलॉजीस का भी इंटीग्रेशन किया है. और मुझे कहते हुए खुशी है कि भारत दुनिया के तमाम देशों में आज डिजिटल टूल्स एंड टेक्नोलॉजीस का हेल्थ केयर में उपयोग करने के मामले में एक अग्रणी देश बनकर उभरा है. हमारे ऐसे बहुत सारे डिजिटल टूल्स हैं जिन्होंने स्वास्थ्य के परिदृश्य को पूरी तरीके से बदल के रख दिया है. मैंने कुछ समय पहले आपको एक उदाहरण दिया था यूवीन पोर्टल का. यूवीन पोर्टल एक ऐसी व्यवस्था है जिसके जरिए हम ढाई करोड़ बच्चे और लगभग 3 करोड़ महिलाओं के एक-एक वैक्सीनेशन सेशन को ट्रैक करते हैं. उसको मॉनिटर करते हैं. यानी कि पहले टीकाकरण कार्यक्रम जब चलता था तो किसको टीका लगा, किसको नहीं लगा, किसको कितना टीका लगा, इसका कहीं कोई हिसाब नहीं होता था. बहुत सारे बच्चे, बहुत सारी महिलाएं अनवैक्सिननेटेड छूट जाते थे.
उन्होंने यह भी कहा कि आज जब हमने यू जैसे एक पोर्टल का उपयोग किया है तो एक-एक सेशन का हमारे पास रिकॉर्ड है और हम फुल इम्यूनाइजेशन कवरेज को 98.7% तक प्राप्त कर चुके हैं. और इसी प्रकार आपने कोविन के कोविड के दौरान देखा हमने कोvिन का उपयोग किया. कोविन ऐप का उपयोग किया. ई रक्त कोष और ई संजीवनी जो हमारा एक ऐसा नेशनल टेलीमेडिसिन नेटवर्क है जो आज डिजिटल माध्यम से दूरदराज बैठे हुए एक पेशेंट को ऑनलाइन एक स्पेशलिस्ट से कंसल्टेशन की सुविधा प्रदान कर रहा है. तो ऐसे बहुत सारे डिजिटल टूल्स का उपयोग आज देश के अंदर हो रहा है. हमारे स्वास्थ्य व्यवस्था में हो रहा है. और इस सबसे आगे जाकर आज जो चर्चा का विषय है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हम कैसे उपयोग करें. मुझे खुशी है कि देश के अंदर हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हेल्थ केयर में बड़े व्यापक रूप से उपयोग किया है. अभी कुछ ही दिन पहले इंडिया एआई इंपैक्ट समिट हुआ था. और दुनिया भर के देश इसमें प्रतिभाग करने के लिए आए थे. भारत की एआई के को लेकर जो एक उभरती हुई शक्ति है उसको पूरी दुनिया से आए हुए प्रतिभागियों ने देखा था और हमने बहुत सारे ऐसे प्रयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अपने स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए हैं जिससे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का हमारा लक्ष्य प्राप्त करना आज आसान हुआ है.
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आज इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ड्रिवन टूल्स को लेकर हम कई अलग-अलग भाषाओं में जो डिजिटल न्यूज़ होती है उसको एनालाइज करके आज हम कहीं अगर किसी बीमारी का आउटब्रेक होने जा रहा है तो उसको समय रहते प्रेडिक्ट कर सकते हैं और इसलिए पहले हमारे देश में कहीं किसी कोने में एक डिजीज आउटब्रेक हो जाता था और हम बाद में रिस्पोंड करते थे. लेकिन आज जब हम उसे प्रेडिक्ट कर पा रहे हैं क्योंकि हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर टूल्स का इस्तेमाल किया है तो ऐसी कई बीमारियों के आउटब्रेक को हम रोक पा रहे हैं. यहां तक कि टीबी मुक्त भारत का सपना लेकर जो हम चल रहे हैं. हमारे ऐसे बहुत सारे टीबी के लिए खासतौर से ऐसे एआई पावर टूल्स हैं जिनका उपयोग करके हमने बड़े पैमाने पर कॉफ अगेंस्ट टीबी एक ऐसा हमारा टूल है. इसका उपयोग करके हम बहुत सारे एसिंटोमेटिक केसेस की पहचान कर पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हमने कम्युनिटी स्क्रीनिंग की. यानी बहुत सारे ऐसे केसेस जो छूट सकते थे जिनकी पहचान शायद नहीं हो पाती. लेकिन इन टूल्स के कारण आज हम ऐसे केसेस की भी पहचान कर रहे हैं जो हमें टीबी मुक्त भारत की दिशा में आगे लेकर जा रहे हैं. और एक नहीं अनेक ऐसे प्रयोग हैं जो आज देश के अंदर किए जा रहे हैं. तो कुल मिलाकर मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि विकसित भारत एक्ट 2047 की यात्रा में स्वास्थ्य एक अहम पड़ाव है और आज भारत की सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वस्थ भारत बनाने के लिए संकल्पित है हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को हम सुल सुलभ किफायती और गुणवत्तापूर्ण जो स्वास्थ्य व्यवस्था है वो सुनिश्चित कर सके और यह एक ऐसी जिम्मेदारी है मैं समझती हूं कि स्वस्थ भारत बनाना एक साझा लक्ष्य है और इसमें सभी स्टेक होल्डर्स को आगे बढ़कर अपना-अपना योगदान देने की आवश्यकता है भारत सरकार के प्रयासों के साथ-साथ हमारे अन्य स्टेक होल्डर्स के भी प्रयास साथ में जुड़ेंगे तो निश्चित रूप से स्वस्थ भारत, आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत का जो संकल्प है वह साकार होगा.
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