बच्चन परिवार के बाद अब करण जौहर की सुप्रीम कोर्ट में एंट्री, जानिए क्या हैं उनकी मांगें

Karan Johar: डिजिटल युग में जहां टेक्नोलॉजी ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इससे जुड़ी चुनौतियां भी सामने आने लगी हैं. खासकर सोशल मीडिया, AI और डीपफेक जैसी तकनीकों के बढ़ते दायरे ने पर्सनालिटी राइट्स यानी "व्यक्तित्व अधिकारों" के दायरे और संरक्षण को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है.

After the Bachchan family now Karan Johar enters the Supreme Court
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Karan Johar: डिजिटल युग में जहां टेक्नोलॉजी ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इससे जुड़ी चुनौतियां भी सामने आने लगी हैं. खासकर सोशल मीडिया, AI और डीपफेक जैसी तकनीकों के बढ़ते दायरे ने पर्सनालिटी राइट्स यानी "व्यक्तित्व अधिकारों" के दायरे और संरक्षण को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है. इसी कड़ी में अब मशहूर फिल्म निर्माता करण जौहर ने भी दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है.

करण जौहर की याचिका इस बात का ताज़ा उदाहरण है कि कैसे सेलेब्रिटीज़ की पहचान, आवाज़, नाम और छवि का इस्तेमाल उनकी जानकारी या सहमति के बिना हो रहा है, और इससे न सिर्फ उनकी पर्सनल ब्रैंड वैल्यू को नुकसान होता है, बल्कि कानूनी और नैतिक सवाल भी खड़े होते हैं.

करण जौहर की याचिका में क्या है मांग?

करण जौहर ने कोर्ट से यह गुहार लगाई है कि उनकी पहचान, लोकप्रियता और ब्रैंड वैल्यू का कोई अनाधिकृत व्यावसायिक या डिजिटल इस्तेमाल न किया जाए. उनके वकील राजशेखर राव ने कोर्ट में तर्क दिया कि करण को यह अधिकार होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति या संस्था उनकी छवि, नाम, आवाज़ या व्यक्तित्व का बिना अनुमति उपयोग न करे, चाहे वह प्रोडक्ट्स की बिक्री में हो या सोशल मीडिया कंटेंट में.

साथ ही उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि ऐसी वेबसाइट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी रोक लगाई जाए, जो करण जौहर के नाम या चेहरे का प्रयोग कर के अवैध रूप से उत्पाद बेच रहे हैं या कंटेंट शेयर कर रहे हैं.

कोर्ट ने क्या कहा?

करण की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि इस मामले को बहुत सूक्ष्म तरीके से देखने की ज़रूरत है. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर मीम या कंटेंट का उद्देश्य अपमान करना नहीं होता; अगर कोई व्यक्ति वास्तव में करण जौहर के नाम या पहचान के ज़रिए प्रोडक्ट्स बेच रहा है, तो उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित करे. कोर्ट केवल उन्हीं मामलों में दखल दे सकता है जहां व्यक्तित्व अधिकारों का व्यावसायिक उल्लंघन स्पष्ट रूप से सामने आता है. जज ने सुझाव दिया कि डोमेन नेम या स्पष्ट उल्लंघन करने वाले लिंक, पेज या प्लेटफॉर्म्स की सूची दी जाए, ताकि कोर्ट कार्रवाई कर सके.

क्या है पर्सनालिटी राइट्स, और क्यों ज़रूरी है इनका संरक्षण?

"पर्सनालिटी राइट्स" का सीधा अर्थ है किसी व्यक्ति की पहचान, छवि, नाम, आवाज़, हस्ताक्षर आदि पर उसका स्वामित्व. यह अधिकार इस बात की रक्षा करता है कि कोई और उस पहचान का अनुचित या व्यावसायिक फायदा न उठा सके.

AI, सोशल मीडिया और फेक कंटेंट के दौर में यह एक गंभीर मुद्दा बन चुका है. अब एक सेलेब्रिटी की आवाज़ या चेहरा नकली वीडियो में डालना मुश्किल नहीं रह गया है, और ऐसे वीडियो या कंटेंट कई बार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं या झूठे उत्पादों की बिक्री में इस्तेमाल हो सकते हैं.

और कौन-कौन सेलेब्रिटी कर चुके हैं ऐसी याचिकाएं?

करण जौहर से पहले भी कई बड़े नाम इस तरह की कानूनी पहल कर चुके हैं:

  • बच्चन परिवार: हाल ही में AI और फेक वीडियोज़ को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई.
  • अनिल कपूर: अपने सिग्नेचर एक्सप्रेशन्स और डायलॉग्स के व्यावसायिक उपयोग को लेकर कानूनी कार्रवाई.
  • जैकी श्रॉफ: उनके नाम और छवि के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई थी.

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