दुश्मन के ड्रोन होंगे तबाह! भारतीय सेना को जल्द मिलेगा ये घातक हथियार, जानें खासियत

Biho Drone Killer: भारत दक्षिण कोरिया से बिहो हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर विचार कर रहा है. दोनों देशों के बीच इस सिस्टम को लेकर बातचीत भी शुरू हो चुकी है. भारतीय सेना की जरूरतों को देखते हुए किए गए ट्रायल में बिहो सिस्टम को सफल पाया गया था.

India acquire South Korea Biho air defense system major weapon against drones
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Biho Drone Killer: भारत दक्षिण कोरिया से बिहो हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर विचार कर रहा है. दोनों देशों के बीच इस सिस्टम को लेकर बातचीत भी शुरू हो चुकी है. भारतीय सेना की जरूरतों को देखते हुए किए गए ट्रायल में बिहो सिस्टम को सफल पाया गया था. इसके बाद भारत ने इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई है. हालांकि, अभी इसकी खरीद को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

डिफेंस पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया की डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन (DAPA) ने बताया कि दिल्ली में भारत और दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिकारियों के बीच हुई जॉइंट कमीशन मीटिंग में इस सिस्टम पर चर्चा हुई. बैठक में 'बिहो सिस्टम' के साथ भारतीय सेना में इस्तेमाल होने वाले K9 सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम पर भी बातचीत हुई. युद्ध में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बिहो भारत के लिए उपयोगी एयर डिफेंस सिस्टम साबित हो सकता है.

भारत की बिहो में क्यों बढ़ी दिलचस्पी?

भारत की बिहो सिस्टम में दिलचस्पी उस समय बढ़ी, जब भारतीय सेना को सेल्फ-प्रोपेल्ड एयर डिफेंस गन और मिसाइल सिस्टम की जरूरत थी. इसके लिए किए गए ट्रायल में दक्षिण कोरिया का K30 बिहो सिस्टम सफल रहा था. रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद भारत ने करीब 2.5 अरब डॉलर की संभावित डील के तहत 104 सिस्टम खरीदने की योजना पर विचार किया था.

भारतीय रक्षा मंत्रालय के शुरुआती फील्ड ट्रायल में बिहो ने कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने में अच्छा प्रदर्शन किया. इस दौरान इसकी तुलना रूस के पैंटसिर-S1 और तुंगुस्का-M1 जैसे सिस्टम से भी की गई थी. बिहो की सटीक निशानेबाजी, भरोसेमंद प्रदर्शन, कीमत और डिलीवरी समय को इसकी खासियतों में गिना गया.

क्या है बिहो हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम?

बिहो हाइब्रिड एयर डिफेंस सिस्टम को दक्षिण कोरियाई सेना के लिए हनवा एयरोस्पेस ने विकसित किया है. इसे खास तौर पर कम ऊंचाई पर आने वाले खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है. इसमें हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता है.

इस सिस्टम में दो 30 एमएम ऑटोमैटिक गन लगी हैं. इसके साथ कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी होती हैं. इसकी गन करीब 3 किलोमीटर तक और मिसाइलें लगभग 7 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती हैं.

बिहो में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम और टारगेट डिटेक्शन सेंसर भी लगाए गए हैं. इसके नए वर्जन में सेंसर, बैटलफील्ड नेटवर्किंग, मोबिलिटी और ड्रोन को रोकने की क्षमता को और बेहतर किया गया है.

ट्रैक चेसिस होने के कारण बिहो को ऊबड़-खाबड़ इलाकों और रेगिस्तान जैसे मुश्किल क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है. यही वजह है कि युद्ध के मैदान में ड्रोन और कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए इसे भारतीय सेना के लिए उपयोगी माना जा रहा है.

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