Earthquake: तिब्बत और चीन में भूकंप से कांपी धरती, 45 मिनट में आए 3 बड़े झटके; जानें कहां था केंद्र

तिब्बत और चीन में गुरुवार रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. करीब 45 मिनट के अंदर इस इलाके में तीन बार भूकंप आया.

Earthquake in Tibet and China 3 major tremors strike within 45 minutes
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Tibet Earthquake: तिब्बत और चीन में गुरुवार रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. करीब 45 मिनट के अंदर इस इलाके में तीन बार भूकंप आया. सबसे पहले आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 मापी गई. इसके बाद 5.2 और 5.0 तीव्रता के झटके भी आए. फिलहाल, इन भूकंपों से हुए नुकसान को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, पहला भूकंप रात करीब 8:03 बजे आया. इसकी तीव्रता 7.0 थी और इसका केंद्र जमीन से 173 किलोमीटर नीचे था. इसके बाद आसपास के इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए.

45 मिनट के अंदर आए 3 बड़े झटके

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, पहला भूकंप रात 8:03 बजे तिब्बत में आया. इसके करीब 27 मिनट बाद, रात 8:30 बजे चीन में 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. फिर रात 8:42 बजे तिब्बत में 5.0 तीव्रता का एक और भूकंप आया.

इस तरह करीब 45 मिनट के अंदर तीन बड़े झटके महसूस किए गए. भूकंप का असर बड़े इलाके में बताया जा रहा है. हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है.

बढ़ सकता है प्राकृतिक आपदाओं का खतरा

विशेषज्ञों और चीनी शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण छिंगहाई-तिब्बत पठार के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इससे इस संवेदनशील क्षेत्र में भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है.

यह पठार ब्रह्मपुत्र समेत कई प्रमुख नदियों का स्रोत है. ये नदियां कई देशों से होकर गुजरती हैं. ऐसे में यहां होने वाले पर्यावरणीय बदलावों का असर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है.

सितंबर में भी तिब्बत में आया था भूकंप

इससे पहले 3 सितंबर को भी तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. उस समय भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई थी. यह दोपहर करीब 1:46 बजे आया था और इसका केंद्र जमीन से लगभग 14 किलोमीटर नीचे था.

नेपाल में बाढ़ के बाद भी आए थे झटके

नेपाल में भी सितंबर में भूकंप आया था. इससे पहले 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन और बाढ़ की गंभीर घटनाएं हुई थीं. इनसे घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था. कई लोग लापता हो गए थे और राहत-बचाव का काम जारी था.