National Emergency In Pakistan: पाकिस्तान इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है. आर्थिक और ऊर्जा संकट के बीच सुरक्षा को लेकर भी हालात गंभीर बने हुए हैं. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा और विद्रोह की घटनाएं सामने आती रही हैं.
वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के साथ अफगानिस्तान की सीमा पर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. इसी बीच पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व खेल प्रशासक नजम सेठी ने दावा किया है कि देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जा सकता है. उनके कार्यक्रम में हाल ही में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई.
पाकिस्तान में आपातकाल क्यों लग सकता है?
नजम सेठी ने कहा कि उनके मुताबिक राष्ट्रीय आपातकाल लगाने पर विचार हो सकता है. उन्होंने इसकी वजह आतंकवाद, अफगानिस्तान के साथ तनाव और बलूचिस्तान में जारी हिंसा को बताया. उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में भी लगातार घटनाएं हो रही हैं और संघीय सरकार तथा प्रांतीय सरकार के बीच सहयोग को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
सेठी का कहना है कि राष्ट्रीय आपातकाल के जरिए केंद्र सरकार को इन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह के कदम से केंद्र को प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है. हालांकि, यह उनका आकलन है और पाकिस्तान सरकार की ओर से राष्ट्रीय आपातकाल लगाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
पाकिस्तान में पहले भी लग चुका है आपातकाल
पाकिस्तान के इतिहास में राष्ट्रीय आपातकाल कई बार लगाया गया है. 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान आपातकाल लगाया गया था. इसके अलावा नवंबर 1971 में राष्ट्रपति याह्या खान के दौर में भी आपातकाल घोषित किया गया था. 1971 के युद्ध और पूर्वी पाकिस्तान के अलग होकर बांग्लादेश बनने के बाद भी यह व्यवस्था जारी रही.
भुट्टो के दौर में भी जारी रहा आपातकाल
जुल्फिकार अली भुट्टो के सत्ता संभालने के बाद भी 1971 में लगाया गया आपातकाल जारी रहा. 1973 में नया संविधान लागू होने के बाद भी उस आपातकाल को जारी रखा गया और संसद ने बाद में इसके विस्तार को मंजूरी दी. इस दौरान कुछ मौलिक अधिकारों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी.
भुट्टो का शासन जुलाई 1977 में जनरल जिया-उल-हक के सैन्य तख्तापलट के साथ खत्म हुआ. इसके बाद जिया ने मार्शल लॉ लागू कर दिया. पाकिस्तान के इतिहास में आपातकाल और मार्शल लॉ अलग-अलग संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्थाएं रही हैं.
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