गुजरात की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिला है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में नई कैबिनेट का गठन किया गया है, जिसमें पुराने चेहरों की छुट्टी करते हुए कई नए और अहम नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. गांधीनगर के महात्मा मंदिर में शुक्रवार को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. इस बार की कैबिनेट में कुल 27 मंत्री बनाए गए हैं, जिनमें 19 नए चेहरे शामिल हैं और 6 मौजूदा मंत्रियों को दोबारा मौका दिया गया है.
रिवाबा जडेजा को पहली बार मंत्री पद
भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की पत्नी और राजकोट की विधायक रिवाबा जडेजा को पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है. वे 2022 के विधानसभा चुनाव में राजकोट (पश्चिम) सीट से बीजेपी के टिकट पर जीतकर आई थीं और अब उन्हें मंत्री बनाकर पार्टी ने महिला सशक्तिकरण का भी संदेश देने की कोशिश की है.
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए अर्जुन मोढवाडिया को भी मिली जगह
राजनीति में एक और बड़ा चेहरा इस बार कैबिनेट में शामिल हुआ है- पूर्व कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया, जो हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. उन्हें भी मंत्री पद देकर बीजेपी ने विपक्ष के बड़े नेताओं को साधने की रणनीति अपनाई है.
पूर्व IPS अधिकारी को भी मंत्री पद
इस बार की कैबिनेट में एक नया और विशेष नाम भी शामिल है- पूर्व आईपीएस अधिकारी पी.सी. बरंडा. प्रशासनिक अनुभव रखने वाले बरंडा को मंत्रिमंडल में शामिल कर सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह कानून व्यवस्था और प्रशासन को और सशक्त बनाने की दिशा में गंभीर है.
महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व
इस बार की टीम में महिलाओं की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी गई है. रिवाबा जडेजा और मनीषा वकील जैसी महिला नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया गया है. इससे साफ है कि बीजेपी राज्य में महिला वोटर्स को ध्यान में रखते हुए राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ा रही है.
भूपेंद्र पटेल सरकार में नए और पुराने मंत्रियों की पूरी सूची:
किन नेताओं को नहीं मिली जगह?
नई कैबिनेट में शामिल किए गए 19 नए चेहरों के साथ कई पुराने और चर्चित नेताओं को इस बार मौका नहीं मिला है. इनमें हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जयेश रादडिया जैसे नाम प्रमुख हैं. ये तीनों नेता गुजरात की राजनीति में बड़ा चेहरा माने जाते हैं, लेकिन उन्हें मंत्री पद से वंचित रखा गया है.
अल्पेश ठाकोर, जो पिछली सरकार में मंत्री थे, उनकी जगह इस बार उपचुनाव जीतने वाले स्वरूप जी ठाकोर को मौका दिया गया है. इसी तरह, विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी के मंत्री बनने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें भी इस बार मंत्री पद नहीं मिला और वे विधानसभा अध्यक्ष के पद पर ही बने रहेंगे.
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