53 साल बाद फिर चांद के पास पहुंचेगा इंसान! जल्द लॉन्च हो सकता है NASA का ये खास मिशन, जानें खासियत

NASA Artemis-II: अंतरिक्ष यात्रा की दिशा में नासा ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है. 1972 में अपोलो-17 मिशन के बाद से चंद्रमा पर मानव भेजने का सपना लंबित था, लेकिन अब नासा ने Artemis-II मिशन के जरिए इस दिशा में कदम बढ़ाने का एलान किया है. यह मिशन चांद के आसपास घूमेगा और इस बार, इंसान फिर से चंद्रमा के पास पहुँचेंगे.

what is nasa Artemis-2 mission crewed lunar
Image Source: Social Media

NASA Artemis-II: अंतरिक्ष यात्रा की दिशा में नासा ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है. 1972 में अपोलो-17 मिशन के बाद से चंद्रमा पर मानव भेजने का सपना लंबित था, लेकिन अब नासा ने Artemis-II मिशन के जरिए इस दिशा में कदम बढ़ाने का एलान किया है. यह मिशन चांद के आसपास घूमेगा और इस बार, इंसान फिर से चंद्रमा के पास पहुँचेंगे. आइए इस मिशन की खासियतें और इसके उद्देश्य जानते हैं.

मिशन की लॉन्च डेट और स्थान

नासा का Artemis-II मिशन फरवरी 2026 में लॉन्च किया जा सकता है. लॉन्च की संभावित तारीख 5 या 6 फरवरी 2026 है, हालांकि अगर कोई देरी होती है, तो इसे अप्रैल 2026 तक टालने की संभावना है. यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से भेजा जाएगा, जो पहले भी अपोलो मिशन का हिस्सा रहा है. इस जगह से अब तक कई ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत हुई है, और अब Artemis-II मिशन का भी यहीं से आरंभ होगा.

क्या है Artemis-II मिशन का रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट?

Artemis-II मिशन को लॉन्च करने के लिए नासा स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट का उपयोग करेगा, जो अपने ब्लॉक-1 वर्जन में चंद्रमा तक ओरियन स्पेसक्राफ्ट, एस्ट्रोनॉट्स और कार्गो को भेज सकता है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट में चार अंतरिक्ष यात्रियों के बैठने के लिए जगह है, और इसमें आधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और कम्युनिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा. ओरियन चंद्रमा के आसपास घूमेगा और फिर पृथ्वी पर वापस लौटेगा. इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि यह चंद्रमा के पास से होकर वापस आएगा, लेकिन चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेगा.

कौन होंगे अंतरिक्ष यात्री?

Artemis-II मिशन में नासा के चार प्रमुख अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे. इनमें मिशन विशेषज्ञ कनाडाई स्पेस एजेंसी के जेरेमी हैनसेन, मिशन विशेषज्ञ नासा की क्रिस्टीन कोच, नासा के पायलट विक्टर ग्लोवर और नासा के कमांडर रीड वाइजमैन शामिल हैं. ये चारों अंतरिक्ष यात्री इस ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा होंगे और चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा करेंगे. उनका लक्ष्य चांद पर लैंडिंग करना नहीं है, बल्कि चंद्रमा के निकट से गुजरकर फिर धरती पर लौटना है.

मिशन की अवधि और उसकी प्रमुख विशेषताएँ

Artemis-II मिशन लगभग 10 दिनों का होगा. यह मिशन पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा, फिर चंद्रमा के पीछे से होकर वापस लौटेगा. चंद्रमा से सबसे नजदीकी दूरी करीब 7400 किमी होगी. इस मिशन का उद्देश्य न केवल इंसानों के साथ स्पेसक्राफ्ट की टेस्टिंग करना है, बल्कि इसका उद्देश्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच करना है. यह मिशन चंद्रमा पर स्थाई बेस बनाने की दिशा में एक अहम कदम होगा और मंगल ग्रह की ओर आगे बढ़ने की तैयारी का हिस्सा है.

क्या है Artemis-II मिशन का उद्देश्य?

Artemis-II मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर इंसानों के कदम रखने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देना है. इस मिशन से न केवल स्पेसक्राफ्ट ओरियन और SLS की टेस्टिंग होगी, बल्कि इसके जरिए नासा चंद्रमा पर एक स्थायी आधार स्थापित करने और मंगल ग्रह तक मानव यात्रा के लिए मार्ग प्रशस्त करने की योजना बना रहा है. इस मिशन के सफल होने से नासा का भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए मार्गदर्शन मिलेगा और एक नई अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत होगी.

ये भी पढ़ें: ट्रंप का ग्रीनलैंड कब्जाने का सपना नहीं होगा पूरा, फ्रांस सहित ये 8 देश हुए एकजुट; अब क्या करेगा अमेरिका?