बंगाल सरकार का बड़ा ऐलान, इस बोर्ड को किया गया भंग; जानें 7 दिन में सीएम शुभेंदु अधिकारी के 7 अहम फैसले

Bengal Police Welfare Board Dissolved: पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने पदभार संभालने के महज 7 दिन में कई बड़े और साहसिक फैसले लिए हैं. उनकी पहली प्राथमिकता राज्य में पुलिस प्रशासन में सुधार और राजनीतिकरण को खत्म करना रही है.

West Bengal Police Welfare Board dissolved about 7 important decisions taken by Suvendu Adhikari
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Bengal Police Welfare Board Dissolved: पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने पदभार संभालने के महज 7 दिन में कई बड़े और साहसिक फैसले लिए हैं. उनकी पहली प्राथमिकता राज्य में पुलिस प्रशासन में सुधार और राजनीतिकरण को खत्म करना रही है. इसी दिशा में शनिवार को उन्होंने पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग कर दिया. यह बोर्ड ममता बनर्जी की सरकार के समय बनाया गया था.

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस प्रशासन के साथ बैठक में कहा कि यह बोर्ड अब असल में एक राजनीतिक दल का हिस्सा बन गया था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले राज्य में “पहले शासक का कानून चलता था, अब कानून का राज होगा.”

पुलिस कल्याण बोर्ड: फायदे और नुकसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस कल्याण बोर्ड को शुरू में अच्छे इरादों के साथ बनाया गया था, ताकि आम पुलिसकर्मियों को कल्याणकारी लाभ मिल सके. लेकिन समय के साथ यह असल में राजनीतिक हितों में बदल गया.

उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड के कुछ अधिकारियों, जैसे शांतनु सिन्हा बिस्वास और बिजितेश्वर राउत, को विशेष लाभ मिले. लेकिन आम पुलिसकर्मियों को असल में लाभ नहीं पहुंचा. इसी वजह से पुलिस कल्याण बोर्ड को तुरंत भंग कर दिया गया. सीएम ने यह भी कहा कि अगर किसी आम नागरिक को पुलिस परेशान करती है, तो वह सीधे पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है. कानून सबके लिए बराबर है.

पुलिस सुधार के लिए नई कमेटी

शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस सुधार के लिए 3 महीने के भीतर नया ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी बंगाल पुलिस के कार्य और संगठन को सुधारने के उपाय करेगी.

सड़क पर अवैध वसूली पर सख्ती

सीएम ने टोटो चालकों, ऑटो ड्राइवरों और फेरीवालों से अवैध वसूली पर भी सख्ती दिखाई. उन्होंने कहा कि पुलिस या लोकल गुंडों द्वारा सड़क पर गाड़ी रोककर टोल के नाम पर पैसे लेना अब बर्दाश्त नहीं होगा.

उन्होंने जनता से कहा कि अगर किसी टोटो, ऑटो या फेरीवाले से पैसे मांगे जाएं, तो सीधे पुलिस को सूचना दें. पुलिस को निर्देश दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई करें. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों पर सबसे कड़ी कार्रवाई होगी.

7 दिन में 7 बड़े फैसले

शुभेंदु अधिकारी ने 7 दिन में कई अहम फैसले लिए हैं. इनमें कुछ प्रमुख हैं:

  • आरजी कर केस में कार्रवाई: रेप और मर्डर केस में कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया. इनमें कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता शामिल हैं.
  • आलू-प्याज की बिक्री पर फैसला: ममता सरकार ने बंगाल से बाहर आलू-प्याज, अनाज, तिलहन, दलहन, फल-सब्जियां और पशु उत्पाद भेजने पर रोक लगाई थी. शुभेंदु सरकार ने इसे हटा दिया.
  • वंदे मातरम को अनिवार्य: अब सभी सरकारी और सरकारी मदद से चलने वाले स्कूलों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाना अनिवार्य होगा. यह फैसला 18 मई से लागू होगा.
  • लाउडस्पीकर और गोवंश नियम: धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज़ तय सीमा में रखी जाएगी और सड़कों पर जाम न बनने दिया जाएगा. साथ ही गोवंश (गाय, बैल, भैंस) की हत्या पर नियम बदले गए हैं. अब बिना अनुमति कोई गोवंश नहीं मार सकता.
  • बीएसएफ को जमीन: ममता सरकार के समय BSF को फेंसिंग के लिए जमीन नहीं मिल रही थी. शुभेंदु सरकार ने इसे तुरंत मंजूर कर दिया. 45 दिन के भीतर BSF को जमीन मिल जाएगी.
  • केंद्र की योजनाओं को लागू करना: ममता सरकार में कई केंद्र सरकार की योजनाएं लागू नहीं थीं. अब आयुष्मान भारत योजना समेत सभी योजनाएं बंगाल में लागू कर दी गई हैं.
  • BNS लागू और ट्रेनिंग: बंगाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू किया गया. इसके साथ ही IPS और IAS अधिकारियों को केंद्रीय ट्रेनिंग का अधिकार भी दिया गया.

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