यूपी में शाह-योगी की जुगलबंदी, फोन पर राहुल-अखिलेश की बात, विपक्षी कुनबे में फिर क्यों मची खलबली?

Political popcorn: अक्टूबर 2026 में ग्रहों की बदलती चाल, त्योहारों और ज्योतिषीय घटनाओं के बीच मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के जीवन में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. जानें करियर, धन, प्रेम और परिवार के मामले में किस राशि के लिए क्या संकेत हैं.

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Political Popcorn

1.शाह-योगी की जुगलबंदी और विरोधियों की खामोशी !

विरोधी ढूंढते रहे दरार की सुई, इधर मंच से चल गया एकता का बुलडोजर!

सियासी हलकों में पिछले कुछ समय से 'शाह बनाम योगी' और सनातन के नाम पर कथित फासलों की जो चटपटी कहानियां गढ़ी जा रही थीं, वे ग्रेटर नोएडा के मंच पर एक ही झटके में भरभराकर गिर पड़ीं. उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के उद्घाटन पर गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच दिखी गजब की केमिस्ट्री ने विपक्ष के पूरे नैरेटिव की हवा निकाल दी. गृह मंत्री ने मंच से खुले दिल से योगी सरकार के कानून-व्यवस्था और माफिया राज के खात्मे की जमकर पीठ थपथपाई. अलबत्ता विरोधी खेमा तो इस उम्मीद में बैठा था कि दिल्ली और लखनऊ के बीच की कथित रार उनके लिए सत्ता का शॉर्टकट बनेगी, लेकिन सामने आई तस्वीरों ने साफ कर दिया कि पार्टी के दोनों मजबूत खंभे पूरी मजबूती से एक साथ खड़े हैं. सचमुच जब मंच पर अमित शाह की चाणक्य दृष्टि और योगी आदित्यनाथ का प्रशासनिक रसूख एक फ्रेम में कदमताल करते दिखे, तो सियासी अफवाहों की दुकान पर सन्नाटा पसरना तय था. राजनीतिक प्रेक्षक इस साझा मौजूदगी को महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिशन यूपी 2027 के लिए खींची गई अभेद्य सियासी लकीर मान रहे हैं. अब विरोधी रणनीतिकारों के सामने यह यक्ष प्रश्न मुंह बाए खड़ा है कि जब मोदी के मार्गदर्शन, शाह की व्यूहरचना और योगी के सुशासन की त्रिवेणी एक सुर में चुनावी मैदान में उतरेगी, तो वे किस औजार से इस किले में सेंध लगा पाएंगे?

2.फोन पर 'मोहब्बत', पर सीटों के नाम पर सन्नाटा!

दिल मिले न मिले, जुबान पर ताले लगाने का फरमान पहले आ गया!

इंडी गठबंधन के दो 'युवराजों' के बीच हॉटलाइन पर लंबी गुफ्तगू हुई है. 30 तारीख की बैठक से पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने फोन पर साथ चुनाव लड़ने की कसमें तो फिर से खा लीं, लेकिन असल मुद्दे यानी सीटों के बंटवारे पर आते ही दोनों ओर से खामोशी छा गई. अलबत्ता, दोनों खेमों को यह अच्छी तरह समझ आ गया है कि उनके अपने ही बड़बोले प्रवक्ता गठबंधन की लुटिया डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे, इसलिए प्रवक्ताओं के मुंह पर टेप लगाने की सख्त हिदायत जारी कर दी गई है. सचमुच जब अंदरूनी अविश्वास इतना गहरा हो कि अपने ही नेताओं पर पहरा बिठाना पड़े तो गठबंधन की एकता पर हंसी आना स्वाभाविक है. राजनीतिक प्रेक्षक चुटकी ले रहे हैं कि साथ लड़ने का दावा तो कर दिया,लेकिन जब यूपी में सीट मांगने की बारी आएगी तब यह दोस्ताना प्यार कितना बचेगा? अब सियासत का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि क्या प्रवक्ताओं को चुप करा देने से सीटों की खींचतान और दिलों की दूरियां छिप पाएंगी?

3.बैठक में 'ना', पर केरल की सैर को 'हां'!

गठबंधन की चाय फीकी लगी, तो कॉमरेड के नारियल पानी पर रीझ गए केजरीवाल!

सीपीएम के एम.ए. बेबी जब अरविंद केजरीवाल के द्वार पर गठबंधन का बुलावा लेकर पहुंचे तो आम आदमी पार्टी के संयोजक ने उन्हें अपने ही चिर-परिचित सियासी अंदाज में घुमा दिया. केजरीवाल ने साफ कर दिया कि वे 30 तारीख को होने वाली इंडी गठबंधन की बैठक में तो नहीं आएंगे, अलबत्ता चुनाव आयोग को कोसने वाले विपक्ष के सुर में सुर जरूर मिलाते रहेंगे. इस बीच बेबी साहब ने उन्हें केरल आने का न्योता थमाया, जिसे 'आप' संयोजक ने फौरन लपक लिया. सचमुच इंडी गठबंधन का यह अजब तमाशा है जहां दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस से दो-दो हाथ करने वाली 'आप' अब केरल जाकर सीपीएम के साथ गलबहियां करने की तैयारी में है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे केजरीवाल की नूरा-कुश्ती राजनीति का नया अध्याय बता रहे हैं, जहां वे गठबंधन में रहकर भी गठबंधन से दूर दिखने की कला साध रहे हैं. अब यह प्रश्न सिर उठाए खड़ा है कि जो दल एक कमरे में साथ बैठने को तैयार नहीं, वे सत्ता पक्ष को चुनौती देने का सपना कैसे पूरा करेंगे?

4.  रूठे 'स्टालिन' को मनाने चिट्ठी-पत्री का खेल !

तमिल में 'अलविदा' कह चुके स्टालिन को अब लाल सलाम से मनाने की जुगत!

तमिलनाडु में विजय की पार्टी (TVK) के साथ कांग्रेस की खिचड़ी पकते ही एम.के. स्टालिन ने इंडी गठबंधन से ऐसा किनारा किया कि दिल्ली के कुनबे में  दक्षिण का मजबूत खंभा ही खिसक गया है, अब कांग्रेस के संकटमोचक बनकर वामपंथी नेता एम.ए. बेबी मैदान में उतरे हैं. बेबी ने स्टालिन को लंबा-चौड़ा भावुक पत्र लिखकर 30 तारीख की बैठक में कम से कम एक नुमाइंदा भेजने की मिन्नतें की हैं. अलबत्ता स्टालिन अपनी शर्तों के पक्के हैं और कांग्रेस की दोहरी चालबाजी से खासे नाराज बताए जा रहे हैं. सचमुच पहले अपने ही सहयोगियों की पीठ में छुरा घोंपना और फिर रूठने पर दूत भेजकर पैर पकड़ना, इंडी गठबंधन की पुरानी फितरत बन चुकी है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे कुनबे को जबरन फेविकोल से जोड़ने की हताश कोशिश करार दे रहे हैं. क्या लाल चिट्ठी से स्टालिन का गुस्सा ठंडा होगा या 30 की बैठक में चेन्नई की कुर्सी खाली ही नजर आएगी?

5.सड़क, सवाल और 'हाथ की सफाई' का सियासी दंगल !

सड़क के गड्ढे भरे न भरे, पर गाल पर 'हाथ' की छाप जरूर छूट गई!

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर गर्मागर्मी का नया अध्याय तब जुड़ गया जब तिलक नगर में सड़क निर्माण को लेकर बहस थप्पड़ तक जा पहुंची. आम आदमी पार्टी ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि सड़क भ्रष्टाचार पर सवाल पूछने पर मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक युवक पर हाथ छोड़ दिया, जबकि पीड़ित युवक अब सस्पेंशन और माफी की मांग पर अड़ा है. अलबत्ता सिक्के का दूसरा पहलू भी तुरंत सामने आ गया मंत्री जी ने वीडियो संदेश जारी कर साफ किया कि जरनैल और उनके साथियों ने कमीशन न मिलने पर रात में बनी सड़क उखाड़ी और उनके परिवार को भद्दी गालियां दीं, जिसके जवाब में एक आम आदमी की तरह स्वाभाविक गुस्सा निकल गया. सचमुच जब सड़क की तारकोल से ज्यादा जुबानी शोले और हाथ-पैर चलने लगें तो राजनीति में कीचड़ उछलना तय हो जाता है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे दिल्ली के सियासी अखाड़े में दोनों पक्षों के बीच चल रहे वर्चस्व और आक्रामकता का नया मोड़ मान रहे हैं. अब जनता की अदालत में यह यक्ष प्रश्न गूंज रहा है कि यह वाकई जनता के सवालों पर भड़का गुस्सा था या फिर परिवार पर हुए हमले के खिलाफ एक आम आदमी का तात्कालिक पलटवार?

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