रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है. इन हमलों के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों के हमलों के खतरे को देखते हुए MBS अब बंकरों और कड़ी सुरक्षा वाले महलों के बीच सावधानी से आवाजाही कर रहे हैं.
रिपोर्ट में सऊदी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि MBS के साथ खास तौर पर चुने गए सुरक्षा गार्डों का दस्ता रहता है. वहीं, इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी के कारण सऊदी अरब के सामने अपने ऊर्जा ठिकानों और शाही महलों की सुरक्षा करना बड़ी चुनौती बन गया है.
MBS की सुरक्षा बढ़ी, मिसाइल हमलों से चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद तक हूती मिसाइलों के पहुंचने और उन्हें रोकने में एयर डिफेंस की नाकामी ने सऊदी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हालिया हमले के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं.
हालांकि, हमलों में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं. इन हमलों ने सऊदी अरब के अहम ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन घटनाओं के बाद देश के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है.
कड़ी सुरक्षा में महलों के बीच आवाजाही
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, 41 वर्षीय मोहम्मद बिन सलमान पिछले छह दिनों से बंकरों वाले और कड़ी सुरक्षा से लैस महलों के बीच आवाजाही कर रहे हैं. उन्हें आखिरी बार मंगलवार को सार्वजनिक रूप से देखा गया था. उस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय दान अभियान के समर्थन में रक्तदान किया था.
मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए रियाद में स्कूलों को भी बंद किए जाने की खबर है. इन घटनाओं के बाद सऊदी अरब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है.
सऊदी अरब पर हुए हमलों की कई देशों ने निंदा की है. यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हालात को खतरनाक बताते हुए हूती विद्रोहियों से आम नागरिकों के ठिकानों पर हमले रोकने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसे हमले दुनिया के अहम परिवहन और ऊर्जा केंद्रों को अस्थिर कर सकते हैं.
सऊदी अरब के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों को रोकने के लिए सऊदी अरब के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी हो रही है. ये मिसाइलें दुश्मन की ओर से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि सऊदी अरब के लिए पूरे देश को हवाई सुरक्षा देना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में उसकी सेना एयर डिफेंस सिस्टम की बैटरियों को अलग-अलग जगहों पर तैनात कर रही है, ताकि ऊर्जा से जुड़े अहम ठिकानों और शाही महलों को सुरक्षा दी जा सके. लगातार बढ़ते हमलों के बीच मिसाइलों की कमी सऊदी अरब के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है.