चीन हो या अमेरिका... फेल हो जाएगा सबका डिफेंस सिस्टम, जानें भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल 'ध्‍वनि' की ताकत

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) जल्द ही देश की नई ध्वनि हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है.

Power of Indias hypersonic missile Dhvani
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Hypersonic Missile Dhvani: भारत ने अपनी सुरक्षा और रक्षा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) जल्द ही देश की नई ध्वनि हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद भारत न केवल अपनी सुरक्षा को और मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक सैन्य महाशक्तियों की सूची में भी अपनी खास जगह बनाएगा. आइए विस्तार से जानते हैं इस क्रांतिकारी मिसाइल के बारे में.

ध्वनि मिसाइल की खासियत इसकी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक तकनीक है. यह मिसाइल मैक-5 से भी तेज़ गति से यानी लगभग 7,400 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है. इतनी तेज गति की वजह से इसे पकड़ पाना और रोक पाना दुश्मनों के लिए लगभग असंभव हो जाता है.

हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल तकनीक

  • ध्वनि मिसाइल पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से बिल्कुल अलग है.
  • यह मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) के रूप में विकसित की जा रही है.
  • मिसाइल को ऊंचाई पर लॉन्च किया जाता है, जहां से यह अपने लक्ष्य की ओर ग्लाइड करती है.
  • इस ग्लाइडिंग क्षमता के कारण इसका पता लगाना और ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है.

इस तकनीक की वजह से मिसाइल की दिशा बदलना और उच्च गति बनाए रखना भी संभव होता है, जो इसे बहुत ही खतरनाक बनाता है.

अत्याधुनिक हीट प्रोटेक्शन और डिजाइन

ध्वनि मिसाइल की लंबाई लगभग 9 मीटर और चौड़ाई 2.5 मीटर है. इसका डिजाइन एक मिश्रित विंग-बॉडी विन्यास पर आधारित है. इसे इतना खास बनाने में इसका हीट प्रोटेक्शन सिस्टम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

  • मिसाइल के बाहरी हिस्से में उच्च तापमान सहने वाले सिरेमिक कंपोजिट का इस्तेमाल किया गया है.
  • यह वायुमंडल में 2,000 से 3,000 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को बखूबी सह सकती है.

इसकी चिकनी और कोणीय सतहें दुश्मन के रडार सिस्टम को धोखा देती हैं, जिससे मिसाइल लगभग अदृश्य हो जाती है.

भारत की सैन्य ताकत में इजाफा

ध्वनि मिसाइल के सफल परीक्षण के साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के हाइपरसोनिक हथियार क्लब में शामिल होने वाला है.

  • DRDO की इस सफलता ने भारत को वैश्विक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है.
  • यह मिसाइल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी गहरा प्रभाव डालेगी.
  • 2029-30 तक इस मिसाइल की तैनाती संभव है, जिससे भारत की सैन्य ताकत में क्रांतिकारी बदलाव आएगा.

भारत का डिफेंस सिस्टम अब और मजबूत

  • ध्वनि मिसाइल के लॉन्च के बाद भारत के डिफेंस सिस्टम को कोई भी चुनौती देना आसान नहीं होगा.
  • चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के लिए यह मिसाइल एक बड़ी चुनौती साबित होगी.
  • पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसके सामने फेल साबित हो सकते हैं.

यह मिसाइल भारत को न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा में मदद करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाएगी.

DRDO की लंबी और कठिन यात्रा

  • ध्वनि मिसाइल की सफलता के पीछे DRDO की मेहनत और तकनीकी शोध है.
  • इस यात्रा की शुरुआत हुई थी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) के सफल परीक्षण से.
  • HSTDV ने स्क्रैमजेट प्रोपल्शन और थर्मल शील्डिंग तकनीक की नींव रखी.

अब ध्वनि मिसाइल इन तकनीकों को और आगे बढ़ाते हुए भारत की सबसे उन्नत मिसाइल प्रणाली बनने जा रही है.

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