Political Popcorn: दादा से लेकर ओवैसी तक, हर तरफ सियासी सरगर्मी! 2027 से पहले दलों ने तेज की अपनी चाल

Political popcorn: रेवंत रेड्डी-ओवैसी की बढ़ती नजदीकियों से कांग्रेस में बेचैनी, मिथुन चक्रवर्ती की नई भूमिका पर सवाल, पुराने दिग्गजों की घर वापसी की कोशिश और 2027 के चुनावों को लेकर बीजेपी-कांग्रेस की नई रणनीतियों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.

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Political Popcorn

1.दक्षिण में दोस्ती की नई पींगें, दिल्ली दरबार में उड़ीं हवाइयां!

हैदराबाद में रेवंत रेड्डी और ओवैसी की जुगलबंदी से कांग्रेस आलाकमान असहज !

​हैदराबाद के सियासी फलक पर इन दिनों मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच दिख रही गजब की जुगलबंदी ने दिल्ली दरबार के कान खड़े कर दिए हैं. दोनों नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे की शान में पढ़े जा रहे कसीदे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं जयराम रमेश, अंबिका सोनी और मुकुल वासनिक को कतई रास नहीं आ रहे हैं. अलबत्ता प्रदेश स्तर पर इसे स्थानीय विकास और सियासी शांति का तकाजा बताकर संतुलन साधने की दलील दी जा रही है. राजनीतिक प्रेक्षक इस बात पर हैरान हैं कि जिस दल को कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी की 'बी-टीम' कहकर घेरती आई है उसी के सिपहसालार की स्थानीय तारीफ पार्टी के राष्ट्रीय विमर्श से मेल कैसे खा सकती है? सचमुच सियासत में 'दुश्मन का दोस्त' कब जरूरत बन जाए, इसका कोई लिखित पैमाना नहीं होता. प्रश्न अब यह उठ रहा है कि क्या एक तरफ एआईएमआईएम नेताओं को पार्टी में शामिल कराने और दूसरी तरफ ओवैसी से गर्मजोशी दिखाने का यह दोहरा रवैया मतदाताओं को भ्रमित नहीं करेगा? दिल्ली की खामोशी में सुलगती नाराजगी इस बात का संकेत है कि यह जुगलबंदी कभी भी अनुशासनात्मक मोर्चे पर आ सकती है !

2.दादा का कद बड़ा या पद छोटा?

पश्चिम बंगाल में मिथुन चक्रवर्ती को मिला संस्कृति सलाहकार का पद, पार्टी के भीतर सुगबुगाहट !

​पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने बयानों से सनसनी फैलाने वाले मिथुन चक्रवर्ती को जब संस्कृति विभाग के सलाहकार का ओहदा सौंपा गया, तो सियासी गलियारों में मुस्कुराहटें तैर गईं. दादा के कद के आगे इस पद को इतना 'बौना' माना जा रहा है कि उनके समर्थकों के चेहरे पर मायूसी साफ पढ़ी जा सकती है. विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस के नेता और टॉलीवुड कलाकार भी चुटकी लेने से नहीं चूके कि 'इतना बड़ा कद और इतना छोटा पद!' अलबत्ता शुभेंदु अधिकारी खेमा इसे संगठन और कला जगत के बीच तालमेल बैठाने की अहम जिम्मेदारी बताकर डैमेज कंट्रोल में जुटा है. राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि सिनेमाई पर्दे के महानायक को प्रशासनिक सलाहकारी के दायरे में समेटना कहीं न कहीं उनके सियासी उपयोग को सीमित करने जैसा है. सचमुच जब महानायक को राजनीति की ककहरा वाली कुर्सी थमाई जाती है तो डायलॉग डिलीवरी से ज्यादा खामोशी गूंजती है. तो बाबू मोशाय प्रश्न यही है कि क्या शुभेंदु अधिकारी आने वाले दिनों में मिथुन दा को कोई बड़ा सियासी कद दिलाकर इस नाराजगी को शांत कर पाएंगे या फिर दादा की यह नई भूमिका महज कागजी बनकर रह जाएगी?

3.रूठों को मनाने का 'मिशन घर वापसी' !
 
गैर-कांग्रेसी राज्यों में जमीन मजबूत करने की कवायद !

​संगठन की कमजोरी से जूझ रही कांग्रेस ने उत्तर भारत के उन राज्यों में जहां वह सत्ता से बाहर है, अपने पुराने दिग्गजों की 'घर वापसी' का सीक्रेट प्लान तैयार किया है. उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर और पंजाब से कांग्रेस छोड़ चुके दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को वापस पार्टी की छतरी के नीचे लाने की जिम्मेदारी राजस्थान और हरियाणा के दो कद्दावर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सौंपी गई है. अलबत्ता पार्टी के भीतर ही एक खेमा यह दलील दे रहा है कि बगावत कर चुके नेताओं को दोबारा तवज्जो देने से वफादार कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट सकता है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे राज्यों में क्षेत्रीय प्रभाव वाले चेहरों के अभाव को दूर करने की एक व्यावहारिक, लेकिन जोखिम भरी कोशिश मान रहे हैं. सचमुच राजनीति का मुसाफिर कितनी भी दूर निकल जाए, अगर मुफीद शर्तें मिलें तो 'घर वापसी' की राह हमेशा खुली रहती है. प्रश्न यही है कि क्या पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर ये पूर्व मुख्यमंत्री अपने पुराने घर लौटेंगे और अगर लौटे भी, तो क्या वे पार्टी को पहले जैसी सियासी संजीवनी दे पाएंगे? फिलहाल पर्दे के पीछे की यह बिसात बेहद तेजी से बिछाई जा रही है !

4.समंदर किनारे चुनावी चौसर !

‘चाणक्य’ ने नापी 2027 की लहर! 30 सीटों का सियासी ब्लूप्रिंट तैयार !

​गृह मंत्री अमित शाह के गोवा आगमन को प्रशासनिक गलियारों में भले ही सरकारी समीक्षा बैठक बताया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक प्रेक्षक इसे 2027 की चुनावी बिसात पर पहली चाल मान रहे हैं. नए ‘अटल भवन’ का लोकार्पण केवल लाल फीता काटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी कैडर को स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब चुनावी मोड में आना होगा. सत्ता पक्ष ने पिछले चुनावों की तुलना में इस बार 30 सीटों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसकी जमीनी टोह लेने खुद शाह मैदान में उतरे. अलबत्ता, हालिया धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर पार्टी के भीतर से ही उभरे दबे-छिपे सुर और ड्रग्स सिंडिकेट पर नकेल कसने की चुनौतियां राह में रोड़े अटका रही हैं. सचमुच बीच और पर्यटन के सुकून भरे माहौल के बीच जब दिल्ली का शीर्ष नेतृत्व कोर कमेटी की क्लास लेता है तो स्थानीय नेताओं के माथे पर पसीना आना स्वाभाविक है. यक्ष प्रश्न यही है कि क्या संगठन और सरकार के बीच का यह तालमेल आंतरिक असहमतियों को पाटकर 2027 में सत्ता की हैट्रिक का मार्ग प्रशस्त कर पाएगा? फिलहाल शाह की इस आमद ने साफ कर दिया है कि तटीय राज्य में आगामी चुनाव की उल्टी गिनती अभी से शुरू हो चुकी है !

5.चौखट से निकलकर चुनावी चौसर पर 'आधी आबादी' !

विरासत की बागडोर अब 'घर' के हाथ!

​उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में अब तक पर्दे के पीछे रणनीतियां बुनने वाली घर की महिलाएं सीधे फ्रंटफुट पर उतर चुकी हैं. समाजवादी पार्टी में डिंपल यादव की बढ़ती सक्रियता के जवाब में अब राष्ट्रीय लोकदल के खेमे से जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी की धमक ने पश्चिमी यूपी से लेकर अवध तक नई हलचल पैदा कर दी है. अलबत्ता दोनों ही दल इसे आधी आबादी को मुख्यधारा में लाने का स्वाभाविक प्रयास बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक प्रेक्षक इसे बीजेपी के उस अभेद्य ‘महिला लाभार्थी वोट बैंक’ में सेंधमारी का सीधा दांव मान रहे हैं, जिसे सत्ता पक्ष ने सुरक्षा और योजनाओं के दम पर अपना मजबूत किला बना रखा है. सपा-रालोद की पुरानी खींचतान के बीच दोनों घरानों की बहुओं का मैदान में उतरना महज एक घरेलू संयोग नहीं, बल्कि 2027 के महासमर की नपी-तुली सोशल इंजीनियरिंग है. सचमुच जब सियासत में जाट अस्मिता, पारिवारिक विरासत और महिला कनेक्ट का कॉकटेल तैयार होता है तो पारंपरिक रणनीतिकारों को भी अपने पुराने फॉर्मूले बदलने पड़ते हैं !अलबत्ता राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि विपक्षी खेमे की यह कवायद दरअसल बीजेपी के उस स्थापित 'मातृशक्ति मॉडल' का ही अनुसरण है, जिसे भगवा दल ने बीते एक दशक में अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है. उज्ज्वला, पीएम आवास और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के सीधे लाभार्थियों के बूते बीजेपी ने बिना किसी शोर-शराबे के हर घर में एक समर्पित और वफादार 'साइलेंट वोटर' तैयार किया है.

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