ओडिशा में विपक्षी चाल, झारखंड में सियासी भूचाल... Political Popcorn में पढ़ें राजनीति की 5 बड़ी खबरें

Political Popcorn: भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों सियासी हलचल तेज है. कहीं चेन्नई मेट्रो के मंच पर केंद्र और राज्य के नेताओं की मुलाकात से नए गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं, तो कहीं ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी के बदले तेवर चर्चा बटोर रहे हैं.

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Political Popcorn

Political Popcorn: भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों सियासी हलचल तेज है. कहीं चेन्नई मेट्रो के मंच पर केंद्र और राज्य के नेताओं की मुलाकात से नए गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं, तो कहीं ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी के बदले तेवर चर्चा बटोर रहे हैं. झारखंड में हेमंत सोरेन के पाला बदलने की अपुष्ट चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है. वहीं, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बयानबाजी जारी है. दूसरी ओर, एलन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क पर निशिकांत दुबे के सवालों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता की बहस को हवा दे दी है. आखिर इन सियासी घटनाक्रमों के पीछे क्या है रणनीति और किसके लिए बजने वाली है खतरे की घंटी? Political Popcorn में पढ़िए राजनीति के गलियारों से निकली पांच दिलचस्प खबरें.

1. मेट्रो का फीता और दक्षिण का गणित!

रफ्तार पटरी पर, दिल गठबंधन पर!

​चेन्नई मेट्रो के नए चरण के उद्घाटन समारोह में जब केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने एक मंच साझा किया तो मंच की मुस्कुराहटों ने सियासी गलियारों में कानाफूसी तेज कर दी. राजनीतिक प्रेक्षक इस संयुक्त शिष्टाचार को विकास कार्यों के सामान्य प्रोटोकॉल से इतर आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं. अलबत्ता सत्ता पक्ष इसे 'सहकारी संघवाद' की मिसाल बताकर अपनी सुशासन छवि को चमकाने में जुटा है. सचमुच दोनों खेमों के प्रवक्ताओं के चेहरे देखकर यह भांपना मुश्किल है कि यह महज प्रशासनिक सौहार्द था या दक्षिण की सियासत में कोई नई खिचड़ी पक रही है. अब यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि उत्तर-दक्षिण के इस 'मेट्रो मिलन' से आगामी चुनाव में किसकी गाड़ी सही ट्रैक पकड़ेगी और किसका सिग्नल लाल होगा.

2. दूर के ढोल, अब पास आकर बोल!

ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी का इंडिया ब्लॉक के सुर में सुर मिलाना!

​ओडिशा में सत्ता परिवर्तन के बाद से बीजू जनता दल  का मिजाज दिल्ली के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. जो पार्टी कल तक केंद्र के हर बिल पर 'सकारात्मक सहयोग' देती थी, वह अब विपक्षी मार्चों में कदमताल करती नजर आ रही है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे अपनी खोई जमीन वापस पाने की छटपटाहट बता रहे हैं. सचमुच क्षेत्रीय दलों की निष्ठाएं मौसम के हिसाब से रंग बदलती हैं. अलबत्ता भाजपा खेमे का कहना है कि जनता ने उन्हें नकार दिया है, इसलिए वे मुद्दे तलाश रहे हैं. सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि क्या बीजेडी का यह नया तेवर स्थायी है या सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति?

3. तीर-धनुष की दिशा और कमल की खुशबू!

जब मौसम बदले सुहाना तो पुराने दोस्तों को भी भूल जाना!
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रांची से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जब हवा में एक सनसनीखेज पतंग तैरा दी गई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पाला बदलकर एनडीए की नाव पर सवार हो सकते हैं. सचमुच भारतीय राजनीति में कब 'पानी और तेल' एक हो जाएं, इसका अंदाजा लगाना मौसम विभाग के बस की बात भी नहीं है. राजनीतिक प्रेक्षक इस अपुष्ट खबर को चश्मे के दोनों सिरों से देख रहे हैं कुछ इसे राज्य में जांच एजेंसियों की तपिश और सत्ता बचाने की मजबूरी का 'रणनीतिक विराम' बता रहे हैं तो कुछ इसे विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की छाती पर मूंग दलने का मनोवैज्ञानिक शिगूफा मान रहे हैं. अलबत्ता सत्ता पक्ष के करीबी रणनीतिकार इसे अपनी स्वीकार्यता और 'सबका साथ' वाली छवि की जीत के तौर पर पेश करने से नहीं चूक रहे, जबकि मुख्यमंत्री खेमे के विश्वस्त इसे महज दिल्ली के कुछ खुराफाती दिमागों की कल्पना करार दे रहे हैं. ​अगर इस गॉसिप में रत्ती भर भी धुआं निकला, तो झारखंड की जमीन पर इंडिया ब्लॉक का क्या हश्र होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं.

4. मदद की पेशकश पर भी तकरार, इजाजत बिना कैसा जमावड़ा यार?

CJP प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की दो टूक!
 
राजधानी की सरहदों पर सुरक्षा की भारी बैरिकेडिंग के बीच पुलिस का साफ कहना है कि अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की दुखद खबर समय पर दी गई थी और यात्रा सुविधा तक की पेशकश हुई, ,लेकिन उन्होंने खुद परिवार से बात करने से हाथ खींच लिए. सचमुच जब मानवीय पहलू पर भी बयानों की सियासत छिड़ जाए तो समझ लेना चाहिए कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही सियासी है. ​राजनीतिक प्रेक्षक इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को सिर्फ कानूनी ब्रीफिंग नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर बने नैरेटिव को काटने की रणनीतिक ढाल मान रहे हैं. पुलिस ने दो टूक सुना दिया कि CJP ने पिछली बार की तरह इस बार भी प्रदर्शन की शर्तों और कायदे-कानूनों की धज्जियां उड़ाईं, जिसके चलते दिल्लीवासियों की सुरक्षा के मद्देनजर इजाजत नहीं दी गई.

5. स्पेस का सुल्तान और संप्रभुता का इम्तिहान!

सैटेलाइट से सिग्नल फेंकिए जनाब, संप्रभुता पर नहीं चलेगा रॉकेट का रौब!

दुनिया के सबसे रईस टेक टायकून एलन मस्क के स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क को लेकर दिल्ली के पावर कॉरिडोर से एक बेहद कड़क संदेश रवाना हुआ है. भाजपा के तेजतर्रार सांसद निशिकांत दुबे ने रक्षा और गृह मंत्रालय की सुरक्षा चिंताओं को ढाल बनाकर मस्क के मंसूबों पर सीधे सवाल दाग दिए हैं. सचमुच लुटियंस दिल्ली के इस तेवर ने यह साफ कर दिया कि भारत का बाजार जितना खुला है उसकी सुरक्षा की चौखट उतनी ही सख्त. सांसद दुबे ने मस्क को 2013-14 के उस दौर की याद भी दिला दी जब ट्राई  ने स्टारलिंक से जुड़े रणनीतिक खतरों को लेकर आगाह किया था. साथ ही उन्होंने मस्क को चुटीली नसीहत दे डाली कि भारत को सिखाने से पहले वे अमेरिका के गरीबों को सस्ता इंटरनेट मुहैया कराएं. राजनीतिक प्रेक्षक इसे भारत के उभरते डिजिटल राष्ट्रवाद और संप्रभु डेटा सुरक्षा की दिशा में एक सोची-समझी लकीर मान रहे हैं. अलबत्ता सत्ता पक्ष के रणनीतिकार यह साबित करने में जुटे हैं कि भारत में निवेश का स्वागत तो है, लेकिन विदेशी दबाव और पूंजी की हनक के आगे राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा.

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