'दुनिया आज भारत के साथ व्यापार करना चाहती है...' पीयूष गोयल ने जेरूशलम से अमेरिका को दिया संदेश!

जेरूसलम की ऐतिहासिक गलियों के बीच वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इन दिनों बेहद व्यस्त कार्यक्रम में जुटे हुए हैं.

Piyush Goyal gave message to America from Jerusalem
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

जेरूसलम की ऐतिहासिक गलियों के बीच वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इन दिनों बेहद व्यस्त कार्यक्रम में जुटे हुए हैं. दुनिया के कई देशों के साथ नए व्यापार समझौते (ट्रेड डील) आगे बढ़ाने, भारत के हितों की रक्षा करने और विदेशों में निवेश आकर्षित करने की चुनौती के बीच वे लगातार वैश्विक वार्ताओं में सक्रिय हैं. इसी दौरान उन्होंने जेरूसलम में भारतीय पत्रकारों के साथ बातचीत की और भारत की बदलती आर्थिक छवि से लेकर इजरायल के साथ भविष्य के सहयोग तक कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं.

पूरी दुनिया भारत के साथ व्यापार करना चाहती है

पीयूष गोयल ने बातचीत की शुरुआत इस टिप्पणी से की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ग्लोबल इकोनॉमिक पावर के रूप में तेज़ी से उभर रहा है, और इसी वजह से आज हर बड़ा देश नई साझेदारी चाहता है.

उन्होंने कहा, "हर मुल्क के वाणिज्य मंत्रियों के साथ मेरी व्यक्तिगत समीकरण बहुत अच्छे हैं. दुनियाभर में एक ही धारणा बनी है. भारत आने वाले दो–ढाई वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. ऐसे में हर देश भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के अवसर तलाश रहा है."

गोयल के अनुसार मीडिया की आलोचना और गहरी नजरें उन्हें परेशान नहीं करतीं, बल्कि यह जानने में मदद करती हैं कि भारत के उद्योगों और समाज की वास्तविक उम्मीदें क्या हैं.

ट्रेड डील्स पर किसी कीमत पर हितों से समझौता नहीं

जब उनसे पूछा गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के दौरान भारत किस सिद्धांत पर निर्णय करता है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी बातचीत में भारतीय हित प्राथमिकता होते हैं.

उन्होंने बताया—

  • किसानों, मछुआरों और MSME क्षेत्र की सुरक्षा
  • भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर
  • बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित करना
  • संवेदनशील क्षेत्रों में संतुलित निर्णय

इन सभी बिंदुओं को हर वार्ता में आधार मानकर आगे बढ़ा जाता है.

गोयल का कहना था कि बातचीत में कठिन पल आते हैं, पर व्यक्तिगत भरोसे और संबंधों से जटिल मसले भी सुलझ जाते हैं.

इजरायल-भारत फ्री ट्रेड अग्रीमेंट की शुरुआत

अपने इजरायल दौरे को अत्यंत सफल बताते हुए उन्होंने पुष्टि की कि दोनों देशों ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय कर लिए हैं. अगला चरण उच्च स्तरीय बैठकों में योजना को अंतिम रूप देने का है.

पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि इस समझौते को दो चरणों में लागू करने का विकल्प भी चर्चा में है, "अगर कुछ अध्यायों पर तुरंत सहमति बन जाती है, तो व्यापार और निवेश तुरंत बढ़ सकता है. इससे दोनों देशों को शुरुआती लाभ भी जल्दी मिलता है."

तेल अवीव का 50 अरब डॉलर मेट्रो प्रोजेक्ट

गोयल ने बताया कि इजरायल सरकार ने तेल अवीव शहर में 50 अरब डॉलर (लगभग ₹4.5 लाख करोड़) का मेगा-ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें 300 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंगों का निर्माण शामिल है.

उन्होंने कहा, "इजरायल चाहता है कि भारतीय कंपनियां इस परियोजना में भाग लें. भारत ने 23 शहरों में मेट्रो निर्माण में शानदार क्षमता दिखाई है. हमारी तकनीक और अनुभव दोनों देशों के लिए फायदेमंद होंगे."

यह परियोजना भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए एक बड़ा वैश्विक अवसर मानी जा रही है.

भारत-इजरायल संबंध: इनोवेशन पर मजबूत तालमेल

भारत और इजरायल के रिश्ते राजनीति से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं. पीयूष गोयल के अनुसार—

  • दोनों देशों ने सुरक्षा, कृषि और टेक्नोलॉजी में समान चुनौतियों का मुकाबला किया है.
  • इनोवेशन, साइबर सिक्योरिटी, हेल्थकेयर और AI में इजरायल का अनुभव भारत के लिए उपयोगी है.
  • R&D में संयुक्त प्रोजेक्ट बनने से भविष्य में बड़े उद्योग विकसित हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, "दोनों देशों के बीच संबंधों में आकाश ही सीमा है. जिस स्तर का भरोसा और मित्रता बनी है, वह साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी."

जेरूसलम में ऑटोनॉमस कार का अनुभव

गोयल के द्वारा जेरूसलम में एक स्वचालित (ऑटोनॉमस) कार का अनुभव साझा किए गए वीडियो ने भारत में काफी ध्यान खींचा. उन्होंने बताया कि भारत के लिए इस तकनीक की सबसे बड़ी आवश्यकता सुरक्षा है.

उन्होंने कहा, "ऑटोनॉमस कारें ड्राइवर के साथ या बिना दोनों तरीकों से चल सकती हैं. अगर इसे भारत में बड़े पैमाने पर अपनाया जाए तो लागत बहुत कम हो जाएगी. इजरायल के एक टेक्नोलॉजी डेवलपर ने कहा कि जो टेक्नोलॉजी यहां 100 डॉलर में बनती है, वह भारत में सिर्फ 20% लागत पर तैयार हो सकती है."

भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन से सेंसर, रडार, कैमरे, अलार्म सिस्टम और AI आधारित सुरक्षा तकनीकें आम लोगों की पहुंच में आ सकती हैं.

ये भी पढ़ें- 'मैंने 8 जंग रोका है...' टैरिफ पर डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा, बोले- अमेरिका के खजाने में आए अरबों डॉलर