Noida Police Action On Mobile Theft Gang: नोएडा पुलिस ने मोबाइल चोरी के एक संगठित और अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है. दिल्ली-एनसीआर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में सक्रिय यह गिरोह चोरी किए गए मोबाइल फोन को बिहार, झारखंड और आगे नेपाल तक सप्लाई करता था.
पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं. आरोपियों के कब्जे से कुल 821 महंगे स्मार्टफोन बरामद किए गए हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब 6 से 8 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है.
पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर द्वारा किया गया सराहनीय कार्य:
— POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR (@noidapolice) January 6, 2026
थाना फेस‑2 पुलिस टीम द्वारा एनसीआर क्षेत्र से मोबाइल फोन चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गैंग के 06 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए व 02 बाल अपचारी पुलिस अभिरक्षा में लिए गए।
कब्जे से चोरी किए गए 821 मोबाइल फोन विभिन्न कंपनियों… pic.twitter.com/OLuCBf4IN3
भीड़भाड़ वाले इलाकों को बनाते थे निशाना
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, साप्ताहिक बाजार, मेले और अन्य सार्वजनिक स्थानों को अपना मुख्य टारगेट बनाता था. इन जगहों पर भारी भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों की जेब, बैग या हाथ से मोबाइल फोन निकाल लेते थे. चोरी के तुरंत बाद मोबाइल को एक जगह इकट्ठा करने के बजाय अलग-अलग ठिकानों पर पहुंचा दिया जाता था, ताकि पुलिस को सुराग न मिल सके.
हर तीन महीने बदलते थे ठिकाने
गिरोह की सबसे खास रणनीति यह थी कि वे दिल्ली-एनसीआर में स्थायी रूप से नहीं रहते थे. आरोपी 2 से 3 महीने के लिए अलग-अलग इलाकों में किराए पर मकान लेते थे और इसी दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल चोरी करते थे. तय अवधि पूरी होने के बाद वे अपना ठिकाना बदलकर वापस बिहार या झारखंड लौट जाते थे. इस तरीके से वे पुलिस की निगरानी से बचते रहते थे और लंबे समय तक सक्रिय बने रहते थे.
बिहार-झारखंड से नेपाल तक फैला नेटवर्क
सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शक्ति अवस्थी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मूल रूप से बिहार और झारखंड के अलग-अलग जिलों से ताल्लुक रखते हैं. ये लोग ट्रेन के जरिए चोरी किए गए मोबाइल फोन को एक साथ अपने गृह राज्यों तक पहुंचाते थे. वहां से आगे इन मोबाइलों को नेपाल भेजा जाता था, जहां इन्हें बेहद कम कीमत पर बेच दिया जाता था. पुलिस का मानना है कि नेपाल में इन मोबाइलों को रीसेट या पार्ट्स में तोड़कर खपाया जाता था.
गिरोह में तय थी हर सदस्य की भूमिका
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के भीतर हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी. कुछ आरोपी भीड़ में घुसकर मोबाइल चोरी करने का काम करते थे. कुछ लोग चोरी किए गए मोबाइलों को इकट्ठा करने, छिपाने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संभालते थे. इस नेटवर्क में शामिल दो नाबालिग संदिग्ध गतिविधियों और पुलिस की मौजूदगी पर नजर रखते थे और खतरा दिखते ही बाकी सदस्यों को इशारा कर देते थे. वहीं, गिरोह के सीनियर सदस्य चोरी के मोबाइलों को ट्रेन के जरिए बाहर भेजने की पूरी व्यवस्था संभालते थे.
आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के भागलपुर और मधुबनी तथा झारखंड के साहिबगंज जैसे जिलों के निवासियों के रूप में हुई है. नाबालिग आरोपी भी इन्हीं राज्यों से संबंध रखते हैं. पुलिस अब सभी आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रहे हैं या नहीं.
बरामद मोबाइलों को असली मालिकों तक पहुंचाना चुनौती
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बरामद किए गए 821 मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाने की है. इसके लिए IMEI नंबर के जरिए डाटा खंगाला जा रहा है और दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग थानों में दर्ज मोबाइल चोरी की शिकायतों से मिलान किया जा रहा है. डीसीपी शक्ति अवस्थी ने बताया कि पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है.
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह और भी बड़ा हो सकता है और इसके तार दूसरे राज्यों तक फैले हो सकते हैं. नोएडा पुलिस की इस कार्रवाई को मोबाइल चोरी के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय ऐसे गिरोहों पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है.
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