Karwa Chauth 2026: इन जगहों पर आज ही मनाया जा रहा है करवा चौथ, जानें कहां कितने बजे निकलेगा चांद

Karwa Chauth 2026: भारत में 29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत, जबकि अमेरिका और कनाडा समेत कुछ देशों में आज यानी 28 अक्टूबर को महिलाएं व्रत रख रही हैं. जानें अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय.

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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का त्योहार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाएं भी पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं. हालांकि, इस साल करवा चौथ की तारीख को लेकर भारत और विदेशों में रहने वाले लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है. भारत में महिलाएं 29 अक्टूबर, गुरुवार को करवा चौथ का व्रत रखेंगी, जबकि अमेरिका और कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग 28 अक्टूबर, बुधवार को यह पर्व मनाएंगे. वहीं, ब्रिटेन में करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इसकी वजह अलग-अलग देशों में चतुर्थी तिथि और स्थानीय चंद्रोदय के समय का अंतर है. ऐसे में विदेश में रहने वाली महिलाओं के लिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार व्रत की तारीख और चांद निकलने का समय जानना जरूरी है.

भारत से अलग क्यों है विदेश में करवा चौथ की तारीख?

हिंदू पंचांग में करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस पर्व में चंद्रोदय के समय का विशेष महत्व है, क्योंकि महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद ही व्रत खोलती हैं. इसी वजह से त्योहार की तारीख तय करने में स्थानीय समय और तिथि की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.

साल 2026 में भारत में चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी. दिल्ली में चांद निकलने का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट है. इस दौरान चतुर्थी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए भारत में करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. अमेरिका और कनाडा के कुछ शहरों में स्थानीय समय के अनुसार चतुर्थी और चंद्रोदय का संयोग 28 अक्टूबर को बन रहा है. इसी कारण वहां व्रत एक दिन पहले रखा जाएगा. 

अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में कब रखा जाएगा करवा चौथ?

अमेरिका और कनाडा में रहने वाली भारतीय महिलाएं बुधवार, 28 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखेंगी. अमेरिका के न्यूयॉर्क में चंद्रोदय का अनुमानित समय शाम 7 बजकर 35 मिनट और कनाडा के टोरंटो में शाम 7 बजकर 45 मिनट है. हालांकि, इन देशों के अलग-अलग शहरों में चांद निकलने का समय अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है.

ब्रिटेन में करवा चौथ की तारीख को लेकर भी भ्रम है. उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारियों के अनुसार, लंदन में यह पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा और चंद्रोदय का अनुमानित समय शाम 6 बजकर 31 मिनट है. इसलिए ब्रिटेन में रहने वाली महिलाओं को 28 अक्टूबर के बजाय 29 अक्टूबर की तारीख के अनुसार तैयारी करनी चाहिए.

करवा चौथ पर सरगी कब खाई जाती है?

करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा के साथ होती है. कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं. इसमें फल, मेवे, मिठाइयां और दूसरी खाने की चीजें शामिल होती हैं. हालांकि, सरगी में क्या रखा जाता है और इसे किस तरह तैयार किया जाता है, यह परिवार की परंपराओं पर निर्भर करता है.

अमेरिका और कनाडा में 28 अक्टूबर को व्रत रखने वाली महिलाओं को स्थानीय सूर्योदय से पहले सरगी खानी होगी. वहीं, भारत और ब्रिटेन में 29 अक्टूबर को व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करेंगी. सरगी का समय तय करते समय अपने शहर के सूर्योदय का समय जरूर देख लें.

करवा चौथ की पूजा कैसे की जाती है?

करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सरगी खाने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखती हैं. पारंपरिक रूप से यह निर्जला व्रत होता है, जिसमें अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता. हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या विशेष परिस्थितियों में व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है.

शाम के समय महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करती हैं. इस दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनने और पूजा की थाली सजाने की परंपरा भी है. इसके बाद चंद्रमा के दर्शन होने पर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है. कई परिवारों में महिलाएं छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं. परंपरा के अनुसार, पति के हाथ से पानी पीकर व्रत का पारण किया जाता है.

करवा चौथ पर चांद निकलने का समय क्यों है जरूरी?

करवा चौथ में चंद्रमा की पूजा के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है, इसलिए चंद्रोदय का समय इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है. भारत, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में स्थानीय समय और पंचांग की गणना अलग होने के कारण व्रत की तारीख में अंतर हो सकता है. विदेश में रहने वाली महिलाओं को भारत के समय के आधार पर व्रत रखने के बजाय उस शहर की तिथि, सूर्योदय और चंद्रोदय का समय देखना चाहिए, जहां वे व्रत कर रही हैं.

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