दुश्मन का ड्रोन आसमान में दिखाई दे और उसे रोकने के लिए सेना अपना एक ऐसा ड्रोन भेजे, जो उसका पीछा करके उसे बेअसर कर सके. भारतीय सेना अब इसी तरह की तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सेना ने AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हाई-स्पीड इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित करने के लिए चेन्नई की कंपनी हील्ड डिफेंस एंड एयरोस्पेस को चुना है. कंपनी ने इसके लिए Talon K सिस्टम पेश किया है.
यह सामान्य निगरानी करने वाला ड्रोन नहीं है, बल्कि इसका मकसद दुश्मन के ड्रोन से निपटने की क्षमता बढ़ाना है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में सवाल है कि Talon K क्या है और यह भारतीय सेना के लिए कितना उपयोगी हो सकता है?
क्या है Talon K और कैसे करेगा काम?
IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक, आज के युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी करने से लेकर हमले करने तक में किया जा रहा है. छोटे और तेज ड्रोन को रोकना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. इसी खतरे को देखते हुए भारतीय सेना डिटेक्शन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीकों पर काम कर रही है.
Talon K इसी व्यवस्था में एक नया विकल्प बन सकता है. इसे दुश्मन के ड्रोन को हवा में रोकने के लिए विकसित करने की योजना है. जहां सामान्य ड्रोन निगरानी और जानकारी जुटाने का काम करते हैं, वहीं इंटरसेप्टर ड्रोन का उद्देश्य दुश्मन के ड्रोन का पीछा कर उसे रोकना होता है. हालांकि, Talon K की वास्तविक क्षमता का पता इसके विकास और परीक्षण के बाद ही चलेगा.
10 से 20 किलोमीटर तक हो सकती है रेंज
कंपनी के मुताबिक, Talon प्लेटफॉर्म की ऑपरेशनल रेंज उसके कॉन्फिगरेशन के आधार पर 10 से 20 किलोमीटर तक हो सकती है. इसकी अधिकतम पेलोड क्षमता 3 किलोग्राम बताई गई है.
हालांकि, ये आंकड़े Talon प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं. इन्हें Talon K के अंतिम प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा सकता. सेना की जरूरतों के अनुसार तैयार होने वाले सिस्टम की क्षमता का आकलन आगे परीक्षण के दौरान किया जाएगा.
बोली लगाकर कंपनी ने हासिल किया प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर टेंडर जारी किया गया था. उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के मुताबिक, हील्ड डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने सबसे कम करीब 10.13 लाख रुपये की बोली लगाई. वहीं, श्री कृष्णा ट्रेडर्स ने लगभग 10.18 लाख रुपये और फ्यूचर विजन एंटरप्राइजेज ने करीब 14.88 लाख रुपये की बोली दी थी.
इस टेंडर की अनुमानित कीमत 44.36 लाख रुपये थी और इसमें कुल 11 बोलियां आई थीं. इनमें से तीन कंपनियां तकनीकी रूप से योग्य पाई गईं.
ध्यान देने वाली बात यह है कि सेना ने फिलहाल विकास के लिए एक सिस्टम का चयन किया है. इसका मतलब यह नहीं है कि Talon K को बड़े पैमाने पर खरीदने का आदेश दे दिया गया है.
दुश्मन के ड्रोन से निपटने में मिलेगी मदद
भारतीय सेना पहले से ही दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए कई तकनीकों पर काम कर रही है. इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए कुछ ड्रोन को रोका जा सकता है, लेकिन हर स्थिति में यह तरीका कारगर हो, जरूरी नहीं है. ऐसे में इंटरसेप्टर ड्रोन सेना की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद कर सकता है.
Janes की मई में आई रिपोर्ट के मुताबिक, हील्ड डिफेंस एंड एयरोस्पेस को सेना से Atlas मोर्टार ले जाने वाले क्वाडकॉप्टर और करीब 30 Talon FPV UAV के ऑर्डर भी मिले थे.
अगर Talon K का विकास और परीक्षण सफल रहता है, तो भविष्य में यह भारतीय सेना की काउंटर-ड्रोन क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है. इससे दुश्मन के ड्रोन से निपटने के लिए सेना को एक और विकल्प मिल सकता है.