Houthi Missiles Drones: यमन के हूती विद्रोही अपनी मिसाइलों और ड्रोन के जरिए सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं. 7 अक्टूबर को रियाद और अभा एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 3 लोगों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई. इसके बाद 11 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक और बड़े हमले की जानकारी सामने आई. इसमें 12 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने का दावा किया गया है.
हूतियों के पास अपनी पारंपरिक वायुसेना नहीं है, लेकिन मिसाइलों और ड्रोन की मदद से वे दूर बैठे दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. सऊदी अरब के अलावा इजरायल और लाल सागर में चलने वाले जहाज भी उनके निशाने पर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि हूतियों के पास कौन-कौन से हथियार हैं और उनकी मारक क्षमता कितनी है?
हूतियों के पास कौन-कौन सी मिसाइलें हैं?
हूतियों के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं. बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंचाई तक जाने के बाद अपने लक्ष्य की ओर गिरती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें विमान की तरह उड़ते हुए निशाने तक पहुंचती हैं.
तूफान (Toufan): इस मिसाइल की मारक दूरी करीब 1,350 से 2,000 किलोमीटर बताई जाती है. इसे ईरान की गद्र मिसाइल से जुड़ा माना जाता है.
फिलिस्तीन-2 (Palestine-2): हूतियों का दावा है कि यह मिसाइल 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला कर सकती है. वे इसे हाइपरसोनिक भी बताते हैं, हालांकि इसकी पूरी क्षमता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
बुरकान (Burkan): इस मिसाइल की अलग-अलग किस्मों की मारक दूरी करीब 800 से 1,200 किलोमीटर बताई जाती है.
हातिम (Hatem): इसकी मारक दूरी करीब 1,450 किलोमीटर बताई जाती है.
कुद्स-4 (Quds-4): यह क्रूज मिसाइल है, जिसकी अनुमानित मारक दूरी 2,000 किलोमीटर तक बताई गई है.
असीफ (Asef): यह समुद्र में चलने वाले जहाजों को निशाना बनाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी मारक दूरी करीब 400 किलोमीटर बताई जाती है.
अल-मंदब (Al-Mandab): यह भी जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्रूज मिसाइल है.
इनमें से कई हथियारों का डिजाइन ईरानी मिसाइल तकनीक से जुड़ा माना जाता है.
हूतियों के ड्रोन कितने खतरनाक हैं?
मिसाइलों के अलावा हूतियों के पास कई तरह के ड्रोन भी हैं. इनमें कम दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन से लेकर लंबी दूरी तक हमला करने वाले विस्फोटक ड्रोन शामिल हैं.
कासेफ-1 और कासेफ-2K ड्रोन की मारक दूरी करीब 200 किलोमीटर बताई जाती है. वहीं, समाद-3 की अनुमानित दूरी 1,200 से 1,800 किलोमीटर है. वईद-2 और समाद-4 की अधिकतम दूरी 2,500 किलोमीटर तक बताई गई है.
इनमें से कुछ ड्रोन लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करते हैं, जबकि कुछ बम गिराने में सक्षम होते हैं. लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन की मदद से हूती अपने ठिकानों से काफी दूर मौजूद लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं.
इनकी एक बड़ी खासियत कम लागत भी है. विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ छोटे ड्रोन करीब 1,500 डॉलर में तैयार किए जा सकते हैं. ऐसे में इन्हें रोकने के लिए महंगे एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. कम कीमत वाले ड्रोन को रोकने में अगर महंगे हथियार खर्च करने पड़ें, तो यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.
हूतियों को इतने हथियार कहां से मिले?
हूतियों ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद उनके हाथ यमनी सेना के कई पुराने हथियार लगे. समय के साथ उन्होंने इन हथियारों में बदलाव किए और अपने ड्रोन बनाने की क्षमता भी बढ़ाई.
अमेरिका और सऊदी अरब का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, तकनीक और प्रशिक्षण देता है. हालांकि, ईरान और हूती इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब्त की गई हथियारों की खेपों की जांच में 800 से ज्यादा उपकरण और करीब 750 टन हथियारों से जुड़ी सामग्री सामने आई. इन उपकरणों के स्रोत 16 अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े बताए गए. इससे हूतियों तक हथियार और सैन्य तकनीक पहुंचने के नेटवर्क की व्यापकता का संकेत मिलता है.
अमेरिका और सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं रोक पाए?
हूतियों को रोकना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि उनकी ताकत केवल मिसाइलों और ड्रोन तक सीमित नहीं है. यमन के पहाड़ी इलाकों में उनके ठिकाने मौजूद हैं, जहां तक पहुंचना और सैन्य कार्रवाई करना आसान नहीं है.
अमेरिका और इजरायल ने 2025 में हूतियों के हथियार ठिकानों पर हमले किए थे. इसके बावजूद हूती मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करते रहे. विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, उनके पास करीब 100 से 200 लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं. हालांकि, यह आंकड़ा अनुमान पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
हूती समुद्र में भी हमले करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. इनमें विस्फोटकों से भरी रिमोट कंट्रोल वाली नावें भी शामिल हैं. नवंबर 2023 में हूती लड़ाकों ने लाल सागर में गैलेक्सी लीडर नाम के मालवाहक जहाज पर कब्जा कर लिया था. इस घटना ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी.
सऊदी अरब और दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा?
हूतियों की मिसाइलों और ड्रोन से होने वाले हमले सऊदी अरब के साथ-साथ समुद्री व्यापार के लिए भी खतरा पैदा करते हैं. अक्टूबर में रियाद, अभा और अदन के एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबरों के बीच सऊदी गठबंधन ने 80 से ज्यादा हूती सैन्य ठिकानों पर हमले करने की जानकारी दी. यमन में नए सिरे से लड़ाई बढ़ने के कारण 2 लाख से ज्यादा लोगों के बेघर होने का भी दावा किया गया है.
इस पूरे संघर्ष में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की अहम भूमिका है. यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. इसी रास्ते से जहाज स्वेज नहर की ओर जाते हैं, जो एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी तनाव के कारण अगर बाब अल-मंदेब में भी हमले बढ़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है. जहाजों को लंबे रास्तों से जाना पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है. इसका असर दुनिया भर में तेल की कीमतों और जरूरी सामान की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है.