ब्लू मून देखने के लिए हो जाइए तैयार, इस हफ्ते आसमान में दिखेगा अनोखा नजारा, जानें इसका विज्ञान

Blue Moon Date: आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह सप्ताह बेहद खास रहने वाला है. मई के आखिरी दिनों में रात का आसमान एक दुर्लभ नजारे का गवाह बनेगा, जिसे दुनियाभर में ‘ब्लू मून’ के नाम से जाना जाता है.

Get ready to see the Blue Moon a unique sight will be seen in the sky this week its science
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Blue Moon Date: आसमान में होने वाली खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह सप्ताह बेहद खास रहने वाला है. मई के आखिरी दिनों में रात का आसमान एक दुर्लभ नजारे का गवाह बनेगा, जिसे दुनियाभर में ‘ब्लू मून’ के नाम से जाना जाता है. दरअसल, जब किसी एक ही कैलेंडर महीने में दो बार पूर्णिमा पड़ती है, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है. इस साल मई महीने की पहली पूर्णिमा 1 मई को दिखाई दी थी, जबकि अब 31 मई को दूसरी बार पूरा चांद आसमान में नजर आएगा. इसी वजह से इसे ब्लू मून कहा जा रहा है.

हालांकि, नाम सुनकर अगर आपके मन में नीले रंग के चांद की तस्वीर बन रही है, तो आपको बता दें कि इसका चांद के रंग से कोई सीधा संबंध नहीं है. ब्लू मून केवल एक खगोलीय और कैलेंडर आधारित घटना है. इस दौरान चांद सामान्य पूर्णिमा की तरह ही दिखाई देता है. इसका नाम सिर्फ इस बात को दर्शाता है कि एक ही महीने में दूसरी बार पूर्णिमा हुई है, जो अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है.

कैसे बनती है ब्लू मून की स्थिति?

वैज्ञानिकों के अनुसार चांद को पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 29.5 दिन लगते हैं. यानी हर 29 से 30 दिनों के बीच एक पूर्णिमा आती है. दूसरी तरफ हमारा सामान्य कैलेंडर 30 या 31 दिनों के महीनों पर आधारित होता है. ऐसे में कभी-कभी स्थिति ऐसी बन जाती है कि महीने की शुरुआत में पूर्णिमा पड़ने के बाद उसी महीने के आखिरी दिनों में दूसरी पूर्णिमा भी आ जाती है. इसी दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है.

अगर इंसान केवल चंद्र कैलेंडर के हिसाब से साल गिनता, तो एक साल वास्तविक सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा हो जाता. यही वजह है कि आधुनिक कैलेंडर को सूर्य और सितारों की गति के आधार पर तैयार किया गया. इस अंतर के कारण कुछ वर्षों में अतिरिक्त पूर्णिमा देखने को मिलती है, जिसे खगोलीय रूप से विशेष माना जाता है.

क्या सच में नीला दिखता है चांद?

ब्लू मून नाम को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है कि इस दिन चांद का रंग बदल जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसा नहीं होता. चांद हमेशा की तरह सफेद या हल्का सुनहरा ही दिखाई देता है. हालांकि, कुछ दुर्लभ मौकों पर वातावरण में धूल, धुआं या ज्वालामुखीय राख की अधिक मात्रा होने पर चांद हल्का नीला दिखाई दे सकता है, लेकिन उसका इस खगोलीय घटना से कोई सीधा संबंध नहीं होता.

खगोल विज्ञान में ब्लू मून की दूसरी परिभाषा भी

दिलचस्प बात यह है कि खगोल विज्ञान में ब्लू मून को परिभाषित करने का एक दूसरा तरीका भी मौजूद है, जिसे ‘सीजनल ब्लू मून’ कहा जाता है. इस नियम के मुताबिक, किसी एक मौसम में अगर चार पूर्णिमा पड़ती हैं, तो तीसरी पूर्णिमा को ब्लू मून माना जाता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस सप्ताह दिखाई देने वाली पूर्णिमा तकनीकी रूप से उस श्रेणी में नहीं आती. खगोल विशेषज्ञों के मुताबिक, उस मानक के आधार पर अगला वास्तविक सीजनल ब्लू मून 20 मई 2027 को देखने को मिलेगा.

आसमान प्रेमियों के लिए खास मौका

खगोल घटनाओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक शानदार मौका माना जा रहा है. मौसम साफ रहने पर 31 मई की रात चांद अपने पूरे आकार और चमक के साथ दिखाई देगा. शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग इस खूबसूरत नजारे का आनंद ले सकेंगे. खासकर फोटोग्राफी और एस्ट्रोनॉमी के शौकीनों के लिए यह रात बेहद खास रहने वाली है.

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