Russia NATO Conflict: क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रही है? रूस और पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन NATO के बीच संभावित टकराव को लेकर यूरोप में चिंता बढ़ी है. रक्षा विशेषज्ञों और थिंक टैंक की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि रूस अगर NATO के किसी सदस्य देश पर सीमित हमला या घुसपैठ करता है तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं. इस संभावित परिदृश्य में एस्टोनिया का सीमावर्ती शहर नारवा चर्चा में है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रूस नारवा पर हमला करने वाला ही है. इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) की रिपोर्ट इसे एक संभावित स्थिति और NATO के लिए चेतावनी के तौर पर देखती है. एस्टोनिया और लातविया भी कह चुके हैं कि उन्हें अपनी सीमाओं के पास रूस की ऐसी सैन्य तैनाती नहीं दिख रही है, जो बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी का संकेत दे.
CIA चीफ की मॉस्को यात्रा के बाद बढ़ी चर्चा
अगस्त 2026 में अमेरिकी CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा ने रूस और NATO के बीच संभावित टकराव को लेकर चर्चा बढ़ा दी. रिपोर्टों के मुताबिक इस यात्रा के दौरान रूसी अधिकारियों को NATO देशों के खिलाफ किसी कार्रवाई से बचने की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई थी. खास तौर पर एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया को लेकर चिंता का जिक्र हुआ.
ISW का आकलन है कि अगर रूस निकट भविष्य में NATO के किसी सदस्य के खिलाफ कार्रवाई करता है तो यह यूक्रेन जैसे बड़े पैमाने के जमीनी हमले के बजाय सीमित हमला, ड्रोन या मिसाइल हमला अथवा छोटी सैन्य घुसपैठ हो सकती है. इसका मकसद NATO की सामूहिक प्रतिक्रिया और आर्टिकल 5 की परीक्षा लेना हो सकता है.
'नारवा' को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
नारवा एस्टोनिया का छोटा शहर है, जो रूस की सीमा के बिल्कुल पास स्थित है. ISW ने इसे संभावित सीमित रूसी घुसपैठ के एक उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल किया है. इसके पीछे कई वजहें बताई गई हैं.
रूसी भाषी आबादी: नारवा में बड़ी संख्या में लोग रूसी भाषा बोलते हैं. ऐसे में किसी संभावित अभियान के लिए रूस रूसी भाषी आबादी की सुरक्षा का मुद्दा उठा सकता है. ISW ने अपने परिदृश्य में इसे रूस की संभावित दलीलों में से एक माना है.
सीमा से बेहद करीब: नारवा एस्टोनिया-रूस सीमा पर स्थित है. नारवा नदी के एक तरफ एस्टोनिया का हरमन कैसल है, जबकि दूसरी तरफ रूस का इवांगोरोड किला है. दोनों देशों की सीमा यहां बेहद करीब है.
NATO के आर्टिकल 5 की परीक्षा: अगर रूस बहुत छोटे इलाके पर कब्जा करके आगे बढ़ने से रुक जाए तो NATO के सामने प्रतिक्रिया का मुश्किल सवाल खड़ा हो सकता है. NATO के आर्टिकल 5 के तहत किसी सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन के खिलाफ हमला माना जाता है, लेकिन सामूहिक जवाब का तरीका NATO देशों के बीच राजनीतिक फैसले पर निर्भर करता है. ISW के मुताबिक रूस ऐसी स्थिति पैदा करके गठबंधन की एकता को परखने की कोशिश कर सकता है.
पश्चिमी देशों को कैसे उलझा सकता है रूस?
ISW के मुताबिक रूस का संभावित लक्ष्य केवल किसी छोटे इलाके पर कब्जा करना नहीं, बल्कि NATO के देशों के बीच मतभेद पैदा करना भी हो सकता है. अगर गठबंधन के देश इस बात पर एकमत नहीं हो पाते कि कैसे जवाब देना है, तो इससे NATO की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है.
रूस किसी सीमित कार्रवाई के जरिए ऐसा संकट पैदा करने की कोशिश कर सकता है जिसमें पश्चिमी देशों के सामने सैन्य जवाब और सीधे रूस से टकराव के बीच फैसला लेने की स्थिति बन जाए. हालांकि, यह भी संभव है कि रूस की ओर से ऐसा कोई कदम उठाया ही न जाए या NATO की प्रतिक्रिया उसके अनुमान से बिल्कुल अलग हो. ISW ने इसी अनिश्चितता को महत्वपूर्ण माना है.
रूस इस आधार पर कर सकता है हमला
थिंक टैंक के संभावित परिदृश्य के मुताबिक रूस एस्टोनिया पर वहां रहने वाले रूसी भाषी लोगों के साथ कथित भेदभाव का आरोप लगा सकता है. इसके साथ ही ड्रोन और दूसरे सैन्य साधनों की तैनाती बढ़ाने जैसी गतिविधियां भी की जा सकती हैं. हालांकि, ये सभी ISW द्वारा बताए गए संभावित कदम हैं, किसी आगामी रूसी अभियान की पुष्टि नहीं.
फिलहाल उपलब्ध आकलनों में एस्टोनिया या बाल्टिक देशों पर रूस के बड़े पैमाने के हमले की तैयारी के संकेत नहीं मिले हैं. इसलिए नारवा को लेकर चर्चा को संभावित युद्ध परिदृश्य और NATO की तैयारियों की परीक्षा के रूप में देखना ज्यादा सही होगा, न कि रूस के तय हमले की खबर के तौर पर.
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