Petrol Diesel Price: 78 दिनों में 51% उछला कच्चा तेल, भारत में कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल? जानें रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक क्रूड ऑयल के दामों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है.

Crude Oil Becomes Expensive Petrol Diesel Price in India Fuel Rates
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक क्रूड ऑयल के दामों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है. बीते 78 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 51 फीसदी तक महंगा हो चुका है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं. दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी भी चिंता बढ़ा रही है. ऐसे में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में आम लोगों को ईंधन के मोर्चे पर और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है. हाल ही में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद आम आदमी का बजट और प्रभावित हुआ है.

क्या आज बदले पेट्रोल-डीजल के दाम?

सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, रविवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है. यानी 15 मई को हुई बढ़ोतरी के बाद दूसरे दिन भी पुराने रेट ही लागू रहेंगे.

देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है. वहीं कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये और डीजल 95.13 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.

आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 106.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है. इसके अलावा चेन्नई में पेट्रोल 103.67 रुपये और डीजल 95.25 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है.

ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल में भारी उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान युद्ध का सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया है. आंकड़ों के मुताबिक 27 फरवरी को खाड़ी देशों का ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. इसके बाद से अब तक इसमें करीब 51 फीसदी की तेजी आ चुकी है और कीमत बढ़कर 109.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

वहीं अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी तेजी से महंगा हुआ है. 27 फरवरी को डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 67.02 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 105.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुकी है. यानी इसमें 57 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, सप्लाई चेन पर दबाव और उत्पादन को लेकर अनिश्चितता की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में तेल और महंगा हो सकता है.

रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई मुश्किल

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ भारतीय रुपये में गिरावट ने भी भारत की परेशानी बढ़ा दी है. डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार कमजोरी देखी जा रही है, जिससे तेल आयात की लागत और ज्यादा बढ़ रही है.

27 फरवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 91.08 के स्तर पर था, लेकिन अब इसमें 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. 15 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.81 पर बंद हुआ. इसका मतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये को करीब 4.73 रुपये का नुकसान हो चुका है.

सिर्फ इस कारोबारी सप्ताह की बात करें तो रुपये में लगभग 2.30 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है. कमजोर रुपये की वजह से भारत को विदेशी मुद्रा में ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है, जिसका असर देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दिखाई दे सकता है.

भारत की अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा दबाव

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. महंगा तेल सरकार के खर्च को बढ़ाता है और ट्रांसपोर्टेशन लागत में इजाफा करता है. इसका असर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक पर दिखाई देने लगता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है. साथ ही सरकार और तेल कंपनियों पर भी कीमतों को नियंत्रित रखने का दबाव बढ़ेगा.

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