₹20 के चक्कर में बुरा फंसा दुकानदार, ग्राहक को बेची महंगी सिगरेट, अब भरना पड़ेगा 10 लाख का जुर्माना

कई बार ग्राहक छोटी रकम समझकर अधिक कीमत वसूलने पर चुप रह जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक उपभोक्ता ने ऐसा नहीं किया. सिर्फ 20 रुपये अधिक वसूले जाने के मामले को उन्होंने कानूनी लड़ाई तक पहुंचाया और आखिरकार फैसला उनके पक्ष में आया.

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 कई बार ग्राहक छोटी रकम समझकर अधिक कीमत वसूलने पर चुप रह जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक उपभोक्ता ने ऐसा नहीं किया. सिर्फ 20 रुपये अधिक वसूले जाने के मामले को उन्होंने कानूनी लड़ाई तक पहुंचाया और आखिरकार फैसला उनके पक्ष में आया. जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले को उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए दुकानदार और संबंधित कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह फैसला बाजार में पारदर्शिता और ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

MRP से ज्यादा कीमत वसूलने पर दर्ज हुई शिकायत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलीगढ़ निवासी देवेश गौतम ने 29 जनवरी को जिला उपभोक्ता आयोग के पास स्थित एक दुकान से सिगरेट का पैकेट खरीदा था. पैकेट पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 340 रुपये अंकित था, लेकिन दुकानदार हीरा लाल वार्ष्णेय ने उससे 360 रुपये लिए. ग्राहक ने मौके पर इसका विरोध भी किया, लेकिन दुकानदार अपने फैसले पर अड़ा रहा. इसके बाद देवेश गौतम ने भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा और मामले की शिकायत उपभोक्ता आयोग में दर्ज करा दी.

सुनवाई से दूर रहा दुकानदार, कंपनी ने दी सफाई

मामले की सुनवाई शुरू होने पर दुकानदार आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई. वहीं सिगरेट निर्माता कंपनी ITC ने आयोग के सामने अपनी सफाई में कहा कि संबंधित दुकानदार उसका अधिकृत विक्रेता नहीं है और उसकी बिक्री गतिविधियों पर कंपनी का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है. कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी प्रकार की कालाबाजारी या अनुचित व्यापारिक प्रथा को बढ़ावा नहीं देती.

आयोग ने दोनों पक्षों को ठहराया जिम्मेदार

उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलीलों से सहमति नहीं जताई. आयोग का कहना था कि जब कोई दुकानदार कंपनी का उत्पाद बेच रहा है तो वह बिक्री श्रृंखला का हिस्सा माना जाएगा. ऐसे में निर्माता कंपनी पूरी तरह अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकती. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 39(1)(के) के तहत आयोग ने दुकानदार और कंपनी दोनों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. यह राशि उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराई जाएगी.

शिकायतकर्ता को मिलेगा मुआवजा

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता से लिए गए अतिरिक्त 20 रुपये 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए जाएं. साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने होंगे. आयोग ने दोनों पक्षों को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है. यदि ऐसा नहीं किया गया तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. यह फैसला उपभोक्ताओं को यह संदेश देता है कि छोटी से छोटी अनियमितता के खिलाफ भी आवाज उठाना उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है.

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