चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी कम्युनिस्ट पार्टी और सेना के कई बड़े नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. रिपोर्ट के मुताबिक, 33 वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है. इनमें सेना के 16 अधिकारी भी शामिल हैं. इस कार्रवाई के बाद चीन की राजनीति और सैन्य नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है. जिनपिंग ने पार्टी और सेना के सदस्यों से आत्म-निरीक्षण करने और व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली बुराइयों को खत्म करने की अपील की है.
बैठक में पहले से कम नेता हुए शामिल
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की केंद्रीय समिति की पांचवीं बैठक में इस बार केवल 279 सदस्य शामिल हुए. अक्टूबर 2025 में हुई बैठक में 315 और जुलाई 2024 में 364 सदस्य मौजूद थे. साल 2022 में जब यह समिति बनी थी, तब इसमें 370 से ज्यादा सदस्य थे. लगातार हो रही कार्रवाई के कारण समिति में सदस्यों की संख्या घटती जा रही है.
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान और अनुशासन बनाए रखने के नाम पर यह कार्रवाई की है. जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रखा है. हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि इस अभियान के जरिए पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत करने और नेताओं की वफादारी सुनिश्चित करने की कोशिश भी की जा रही है.
किन बड़े नेताओं पर हुई कार्रवाई?
हटाए गए नेताओं में शिनजियांग के पूर्व पार्टी प्रमुख मा शिंगरुई, पूर्व जनरल झांग युशिया और लियू झेनली के नाम शामिल हैं. प्रमुख राजनयिक लियू जियानचाओ भी इस कार्रवाई की जद में आए हैं.
झांग युशिया चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. यह संस्था देश की सेना की देखरेख करती है. सेना के इतने वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई से चीन की सेना के नेतृत्व और उसकी युद्ध की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
इस बीच CMC के उपाध्यक्ष झांग शेंगमीन को कम्युनिस्ट पार्टी के 24 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में जगह दी गई है. इसके बाद वह इस आयोग से जुड़े एकमात्र प्रतिनिधि रह गए हैं.
जिनपिंग की सत्ता पर पकड़ और होगी मजबूत?
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की अगली बड़ी बैठक 2027 के आखिरी महीनों में होने की संभावना है. इस बैठक में पार्टी के नए नेतृत्व को लेकर फैसला हो सकता है. माना जा रहा है कि शी जिनपिंग चौथे कार्यकाल के लिए भी दावा पेश कर सकते हैं.
अगर ऐसा होता है, तो वह चीन में नेताओं के 10 साल बाद पद छोड़ने की पुरानी परंपरा से आगे निकल जाएंगे. बड़े नेताओं और सैन्य अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई को आगामी नेतृत्व बदलाव से पहले पार्टी पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
जिनपिंग पहले भी उन नेताओं को चेतावनी दे चुके हैं, जो ऊपर से पार्टी के प्रति वफादारी दिखाते हैं, लेकिन उसके निर्देशों का पालन नहीं करते. ऐसे में माना जा रहा है कि इस अभियान का मकसद भ्रष्टाचार रोकने के साथ-साथ राजनीतिक वफादारी पर नियंत्रण रखना भी है.
क्या जिनपिंग को तख्तापलट का डर है?
कार्नेगी चाइना के विशेषज्ञ चोंग जा इयान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहा अभियान अब सिर्फ रिश्वतखोरी रोकने तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल सत्ता को बनाए रखने और मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है.
यह कार्रवाई केवल सेना और कम्युनिस्ट पार्टी तक सीमित नहीं है. द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्टों के मुताबिक, रणनीतिक रूप से अहम उद्योगों से जुड़े कई बड़े कारोबारी अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया है या वे अचानक सार्वजनिक नजरों से गायब हो गए हैं.
इससे चीन के कारोबारी माहौल को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं. हालांकि, बड़े नेताओं और सैन्य अधिकारियों को हटाए जाने के पीछे तख्तापलट का डर होने की कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल इन घटनाओं ने चीन की सत्ता और सेना के भीतर चल रही हलचल को चर्चा में ला दिया है.
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