ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने एक फोन वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सख्त चेतावनी दी है — अगर अमेरिका ब्राजील के साथ वास्तव में आर्थिक साझेदारी को बढ़ाना चाहता है, तो उसे 40 फ़ीसदी टैरिफ को तुरंत वापस लेना चाहिए. यह बातचीत सोमवार को हुई, जिसमें लूला ने ट्रम्प को स्पष्ट कहा कि यह कराधान अन्यायपूर्ण है और ब्राजील इसे स्वीकार नहीं करेगा.
राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, 30 मिनट की इस कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने फोन नंबर साझा किए और इस वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. उस बातचीत के दौरान लूला ने ट्रम्प को आगामी बेलेम (Belem) में होने वाले जलवायु सम्मेलन में आने का निमंत्रण भी दिया.
40% से बढ़ाकर 50% तक टैरिफ: ब्राज़ील के लिए गहरा झटका
जुलाई में ट्रम्प प्रशासन ने ब्राजील के निर्यात पर पहले से लागू 10% टैरिफ में 40% का इजाफा कर दिया. यानी अब कुल 50% शुल्क देना होगा. यह कदम उन व्यापार निर्णयों की तरह ही है जो अन्य देशों, जैसे भारत, पर पहले भी लगाए गए थे. खासकर इस्पात और एल्यूमीनियम उद्योग में. लूला ने इस निर्णय को ‘अन्यायपूर्ण’ करार देते हुए यह तर्क पेश किया कि ब्राजील उन तीन G20 देशों में शामिल है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार आकस्मिक रूप से सकारात्मक है. उनका कहना था कि ब्राजील ने अमेरिका से कई गुना अधिक वस्तुएं खरीदी हैं, लेकिन इस तरह का अधिभार जैसा कि अमेरिका ने लगाया — असंतुलन को और गहरा करता है.
“साझेदारी हो, लेकिन बराबरी की शर्तों पर”
लूला ने ट्रम्प से कहा कि ब्राजील निष्पक्ष और सम्मानजनक व्यापार चाहता है. जहां शर्त बराबरी की हो. उन्होंने आगे कहा कि यदि यह टैरिफ नहीं हटाए गए तो ब्राजील के किसान, उद्योग और निर्यातक भारी नुकसान में होंगे. उनके इस संवाद का इरादा यह दिखाना था कि ब्राजील आर्थिक सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन अपनी संप्रभुता पीछे नहीं छोड़ेगा.
ट्रम्प प्रशासन का पक्ष: जोखिम व औचित्य
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह टैरिफ “आर्थिक आपातकाल” के दृष्टिकोण से आवश्यक थे. उनका कहना है कि ब्राजील में राजनीतिक अस्थिरता विशेष रूप से पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो पर लगे मुकदमों की वजह से अमेरिकी निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर रही है. ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि इस तरह की नीतियाँ अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी हो गई थीं.
चुप्पी और सक्रियता: अमेरिकी प्रतिक्रिया व ब्राज़ील की ठोस स्थिति
व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत बयान नहीं दिया. जब उनसे पूछा गया, तो उन्होंने “कोई टिप्पणी नहीं” कहा. वहीं ब्राज़ील सरकार ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे. लूला के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस कदम का मकसद ट्रम्प को यह संदेश देना है कि अगर वह ब्राजील को सचमुच दोस्त मानते हैं, तो यह हालात स्वीकार्य नहीं हो सकते.
भारत और ब्राजील: साझा व्यापार-तकरार का माडल?
विश्लेषकों का कहना है कि ब्राजील की यह स्टैंडशील स्थिति भारत‑अमेरिका तनाव को याद दिलाती है. 2018‑19 में अमेरिका ने भारत पर स्टील और एल्यूमीनियम पर बड़े शुल्क लगाए थे, जिससे भारत ने कई अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी कर लगाए. अब ब्राजील भी उसी राह पर जा सकता है. यदि अमेरिका टैरिफ वापस नहीं लेता तो ब्राजील भी कदम उठा सकता है. स्थानीय उद्योग संघों के अनुसार, अगले एक वर्ष में यदि यह कर प्रणाली बदली न जाए तो ब्राजील को लगभग 5 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है. खासकर कृषि, इस्पात और निर्माण सेक्टर को यह अधिक प्रभावित करेगा.
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