नई दिल्ली: भारत 24 के कॉन्क्लेव 'Bharat Uday Summit' में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. इस दौरान भारत 24 के मंच पर गौरव वल्लभ ने पीएम मोदी को लेकर कई बातें कही. इसके साथ ही उन्होंने भारत के अर्थव्यवस्था पर भी विस्तार से बात की.
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के बाद आपने उनमें क्या खास देखा और क्या सीखा?
जवाब: मुझे लगता है कि किसी भी लीडर के लिए सबसे जरूरी चीज एक अच्छा लिसनर होना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में यह खूबी बहुत ज्यादा है. अगर आप उनसे कोई बात कहना चाहते हैं तो वह आपको पूरा समय देते हैं और आपकी बात सुनते हैं. मेरा मानना है कि एक अच्छा लिसनर ही अच्छा डिसीजन मेकर और अच्छा लीडर बन सकता है.
मैंने मैनेजमेंट पढ़ाया है और मैनेजमेंट में भी लीडरशिप के लिए क्रिटिकल थिंकिंग को बहुत अहम माना जाता है. क्रिटिकल थिंकिंग बेहतर लिसनिंग से आती है. प्रधानमंत्री जी किसी विषय के एक्सपर्ट की बात सुनते हैं, उनसे चर्चा करते हैं, अपना पक्ष रखते हैं और फिर फैसला लेते हैं.
सवाल: लेकिन GDP के आंकड़ों को लेकर सवाल उठते हैं. अगर GDP बढ़ रही है, लेकिन रोजगार और आमदनी उसी रफ्तार से नहीं बढ़ रही, तो क्या इसे अर्थव्यवस्था की सफलता माना जा सकता है?
जवाब: मैं इधर-उधर की बात नहीं करूंगा, सीधे आंकड़ों की बात करूंगा. IMF ने कहा है कि भारत दुनिया की ग्रोथ का इंजन है. भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 7.8 फीसदी रही है.
कुछ लोग इसे लेकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों के बयान से देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती. भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से बढ़ रही है और मौजूदा वित्त वर्ष में भी अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है.
मुझे दुख होता है जब देश के ही लोग भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकॉनमी' कहते हैं. अगर अर्थव्यवस्था इतनी खराब होती तो देश के टैक्सपेयर्स से मिलने वाले पैसे से नेताओं की सुविधाएं कैसे चलतीं?
सवाल: लेकिन विपक्ष रोजगार, महंगाई और इनकम इनइक्वालिटी जैसे मुद्दे उठाता है. खासकर मिडिल क्लास को लेकर भी सवाल हैं. आपका क्या कहना है?
जवाब: अगर 56 करोड़ लोगों के पहली बार बैंक खाते खुले हैं, तो क्या यह इंक्लूसिव डेवलपमेंट नहीं है? मुद्रा लोन के तहत बड़ी रकम का डिस्बर्समेंट हुआ है. पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए हैं.
मुद्रा लोन का बड़ा हिस्सा महिलाओं को मिला है. महिलाओं की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन भी बढ़ी है. देश में नए यूनिकॉर्न बने हैं और अर्थव्यवस्था के कई नए सेक्टर खोले गए हैं. ये सभी इंक्लूसिव ग्रोथ के उदाहरण हैं. अगर कोई इनकम इनइक्वालिटी की बात करता है तो उसे आंकड़े भी देने चाहिए. सिर्फ आरोप लगाने से बात साबित नहीं होती.
सवाल: लेकिन महंगाई भी आम लोगों को प्रभावित करती है. GDP ग्रोथ के साथ महंगाई को लेकर क्या स्थिति है?
जवाब: महंगाई का असर होता है, मैं इससे इनकार नहीं कर रहा. लेकिन यह कहना कि महंगाई पूरी ग्रोथ को खत्म कर रही है, आंकड़ों के हिसाब से सही नहीं है.
दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है. इसके मुकाबले भारत 7.8 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. अमेरिका, चीन और दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी भारत की ग्रोथ काफी मजबूत है.
सवाल: आपने भारत को सिर्फ सबसे तेज नहीं, बल्कि मजबूत ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था भी बताया. इसकी वजह क्या है?
जवाब: अर्थव्यवस्था के तीन बड़े हिस्से हैं- कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस. भारत में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों अच्छी रफ्तार से बढ़ रहे हैं.
मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए सरकार ने PLI जैसी योजनाएं शुरू की हैं. इन योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़े हैं. आज भारत सिर्फ रक्षा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात नहीं कर रहा, बल्कि कई चीजों का निर्यात भी कर रहा है.
सवाल: लेकिन डिफेंस सेक्टर में अभी भी टेक्नोलॉजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता है. इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: किसी भी विकास की शुरुआत एक कदम से होती है. अगर हम शुरुआत ही नहीं करेंगे तो आगे टेक्नोलॉजी कैसे विकसित होगी?
भारत ने रक्षा उत्पादन में आगे बढ़ना शुरू किया है. आज हम अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ दूसरे देशों को भी रक्षा उपकरण एक्सपोर्ट कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की दिशा में भी काम हो रहा है. आने वाले समय में इसमें और सुधार होगा.
सवाल: राहुल गांधी अगर भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड इकॉनमी' कहते हैं तो आपको आपत्ति होती है, लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप ऐसी बात कहते हैं तो भारत उनके साथ बातचीत करता है. इसमें फर्क क्या है?
जवाब: राहुल गांधी भारत के नागरिक हैं और देश के नेता प्रतिपक्ष हैं. देश उनके ऊपर खर्च करता है, इसलिए उनकी बातों पर सवाल पूछना जरूरी है.
ट्रंप दूसरे देश के नेता हैं. उनके बयान पर भारत सरकार को अपने हित के हिसाब से प्रतिक्रिया देनी होती है. भारत 24 जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म पर भारत से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. किसी दूसरे देश का व्यक्ति क्या कह रहा है, उसका संदर्भ अलग है.
सवाल: UPI को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. अगर UPI पर MDR लगाया जाता है तो क्या इसका बोझ आम लोगों पर आएगा?
जवाब: बिल्कुल नहीं. आम कंज्यूमर पर MDR का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा. 2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर न ग्राहक को और न दुकानदार को यह शुल्क देना है. 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट के स्तर पर 0.4 फीसदी MDR की बात है. यह सरकार का टैक्स नहीं है. यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट है.
क्रेडिट कार्ड के मुकाबले UPI का MDR अभी भी कम है. इसका उद्देश्य UPI के IT इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी को मजबूत रखना है, ताकि इतने बड़े डिजिटल पेमेंट सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित रखा जा सके.
सवाल: आप पहले कांग्रेस के लिए आर्थिक मामलों पर काम करते थे और अब मोदी सरकार के साथ हैं. दोनों जगह की सोच में आपको सबसे बड़ा अंतर क्या नजर आता है?
जवाब: मैंने कई बार इसका उदाहरण दिया है. कांग्रेस में कई बार ऐसा देखने को मिला कि एक तरफ किसी उद्योगपति के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस होती थी और कुछ घंटे बाद वही उद्योगपति कांग्रेस के मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात करता था. मेरे हिसाब से कथनी और करनी में यही फर्क है. कई मुद्दों पर सुविधानुसार अपना स्टैंड बदल दिया जाता है.
उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य में छात्रों की समस्याएं हैं तो उन पर हर जगह समान तरीके से बात होनी चाहिए. किसी एक राज्य में छात्रों की आवाज उठाना और दूसरे राज्य में उसी तरह के मुद्दे को नजरअंदाज करना सही तरीका नहीं है.
सवाल: क्या आपको लगता है कि विपक्ष को अपनी भूमिका ज्यादा रचनात्मक तरीके से निभानी चाहिए?
जवाब: बिल्कुल. लोकतंत्र में डिबेट, डिस्कशन और डिलिबरेशन बहुत जरूरी हैं. संसद में काम रुकना किसी के हित में नहीं है. अगर विपक्ष के पास कोई वैकल्पिक विकास मॉडल है तो उसे संसद में रखना चाहिए. सरकार की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन उसके साथ चर्चा और समाधान की कोशिश भी होनी चाहिए. लोकतंत्र में सिर्फ विरोध करना ही पर्याप्त नहीं है.
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