Bangladesh Coup: बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक हलचल बढ़ने के दावे किए जा रहे हैं. ढाका में पर्दे के पीछे कुछ बड़ी बैठकें होने की बात सामने आई है. एक रिपोर्ट में बांग्लादेश की खुफिया जानकारी के हवाले से दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी सरकार को कमजोर करने के लिए 'माइनस टू' योजना पर काम चल रहा है. इसमें तारिक रहमान को विवादों में घेरकर राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित योजना में तुर्की और पाकिस्तान से जुड़े अधिकारियों के अलावा बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान का नाम भी सामने आया है. हालांकि, ये सभी दावे खुफिया सूत्रों के हवाले से किए गए हैं.
तारिक को कमजोर करने की कोशिश
नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 22 और 23 सितंबर को मेजर जनरल महबूबुल आलम के घर पर बैठक हुई. आलम बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोफेशनल्स के वाइस चांसलर हैं, जो सेना के अधीन चलती है. बैठक में अमर देश के संपादक महमूदुर रहमान और पूर्व सेना अधिकारी हसीनुर रहमान के शामिल होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में तुर्की की खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी के बैठक में मौजूद होने की बात भी कही गई है.
सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में लंबे समय तक चलने वाली एक 'गैर-राजनीतिक सरकार' बनाने के रोडमैप पर चर्चा हुई. दावा है कि इस योजना को सेना और जमात-ए-इस्लामी का समर्थन हासिल है और इसे तुर्की से फंडिंग तथा पाकिस्तान से योजना मिलने की बात कही गई है. कथित तौर पर इसका मकसद बीएनपी और अवामी लीग, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को कमजोर करना है.
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अब्दुल्ला अमान आजमी और हसीनुर रहमान पहले सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान के साथ नियमित संपर्क होने की बात कह चुके हैं. साथ ही सेना की कमांड व्यवस्था को लेकर भी कई दावे किए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की सैन्य खुफिया व्यवस्था के भीतर एक कथित इस्लामिक काउंटर-टेररिज्म गठबंधन भी सक्रिय है और ब्रिगेडियर शौकत उस्मान को इसका ग्रुप लीडर बनाए जाने की बात कही गई है.
तारिक का हसीना जैसा हाल!
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 5 अगस्त 2024 के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनका परिवार देश से बाहर है और अब सरकार विरोधी ताकतें तारिक रहमान और उनके परिवार को भी राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की योजना बना रही हैं. खुफिया सूत्र के हवाले से विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के इस समूह से कथित संबंध होने की बात कही गई है.
इसी रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान तारिक रहमान की तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात हुई. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक एर्दोगन और तारिक रहमान की मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी.
नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एर्दोगन और पेजेश्कियान के साथ मुलाकातें पहले से तय नहीं थीं और इन्हें तारिक रहमान की विदेश नीति को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
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