दिल्ली ब्लास्ट से पहले फरीदाबाद में मिली थी Mini Beast, जानें AK47 की इस छोटी बहन की क्यों हो रही इतनी चर्चा

AK Krinkov: दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार शाम हुए विस्फोट से पहले हरियाणा के फरीदाबाद में जो घटनाएं हुईं, उन्होंने देश की सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर दिया. जांच के दौरान एक कश्मीरी मूल के डॉक्टर मुजम्मिल की गिरफ्तारी से अब तक की सबसे बड़ी विस्फोटक बरामदगी हुई है.

AK Krinkov found in Faridabad before Delhi blast this younger sister of AK47 is being discussed
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AK Krinkov: दिल्ली के लाल किले के पास सोमवार शाम हुए विस्फोट से पहले हरियाणा के फरीदाबाद में जो घटनाएं हुईं, उन्होंने देश की सुरक्षा एजेंसियों को झकझोर दिया. जांच के दौरान एक कश्मीरी मूल के डॉक्टर मुजम्मिल की गिरफ्तारी से अब तक की सबसे बड़ी विस्फोटक बरामदगी हुई है.

डॉक्टर की निशानदेही पर फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने करीब 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, भारी मात्रा में कारतूस, हथियार और एक AK Krinkov असॉल्ट राइफल बरामद की जो अब जांच के केंद्र में है.

8 से 9 नवंबर तक चला संयुक्त ऑपरेशन

फरीदाबाद के पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि 8 नवंबर की रात को शुरू हुआ यह अभियान अगले दिन सुबह तक चला. डॉक्टर मुजम्मिल की पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने धौज गांव और फतेहपुर तगा रोड पर बने दो ठिकानों पर छापे मारे. इन छापों में जो बरामदगी हुई, उसने सभी एजेंसियों को चौंका दिया. पुलिस ने एक AK Krinkov (AKS-74U) असॉल्ट राइफल, 3 मैगज़ीन, 83 जिंदा कारतूस, एक पिस्टल और उसकी 8 गोलियां और साथ ही 2 अतिरिक्त मैगज़ीन जब्त कीं.

दूसरे ठिकाने से पुलिस को लगभग 358 किलो अमोनियम नाइट्रेट मिश्रण, विभिन्न ज्वलनशील रसायन, बैटरी, वायर, टाइमर, रिमोट कंट्रोल, मेटल शीट, और IED बनाने वाले उपकरण मिले. बाद में तलाशी के दौरान एक अन्य कमरे से करीब 2,500 किलो और संदिग्ध विस्फोटक बरामद हुआ. यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकी सामग्री जखीरा माना जा रहा है.

AK Krinkov- दिखने में छोटी, लेकिन जानलेवा राइफल

इस बरामदगी में सबसे अहम वस्तु थी, AK Krinkov, जो आधिकारिक रूप से AKS-74U के नाम से जानी जाती है. यह राइफल देखने में भले ही छोटी लगती हो, लेकिन इसकी मारक क्षमता बेहद घातक है. 1979 में सोवियत संघ ने इसे डिजाइन किया था. यह राइफल स्पेशल फोर्स, पैराट्रूपर्स और वाहनों में तैनात सैनिकों के लिए बनाई गई थी, ताकि वे तंग जगहों में भी एक तेज़, हल्की और प्रभावशाली राइफल का इस्तेमाल कर सकें.

AK Krinkov को मिखाइल कालाशनिकोव (Mikhail Kalashnikov) और उनकी टीम ने इज़्हमैश (Izhevsk) डिजाइन ब्यूरो में विकसित किया था.
यह मूल रूप से AK-74 राइफल का कॉम्पैक्ट संस्करण है.

क्रिनकॉव की ताकत और तकनीकी विवरण

AKS-74U में 5.45×39 मिमी की उच्च वेग वाली गोलियां उपयोग होती हैं, जो इसे बहुत तेज़ और सटीक बनाती हैं. इसकी बैरल लंबाई केवल 210 मिमी होती है, जो पारंपरिक AK-47 से काफी छोटी है. राइफल का यह छोटा आकार इसे नजदीकी युद्ध (Close Combat) के लिए आदर्श बनाता है. यह वाहन, इमारतों या तंग गलियों में लड़ाई के दौरान आसानी से उपयोग की जा सकती है.

जब इसे चलाया जाता है, तो इसकी फायर रेट 700 राउंड प्रति मिनट तक होती है. फायरिंग के समय इसकी तेज आवाज़ और मुँह से निकलने वाली लौ (Muzzle Flash) इसे पहचानने योग्य बनाती है. इसी वजह से इसे “लघु दानव” (Mini Beast) कहा जाता है.

नाम "Krinkov" कहां से आया?

दिलचस्प बात यह है कि “क्रिनकॉव” नाम सोवियत सेना की किसी आधिकारिक किताब में नहीं मिलता. यह नाम अफगान-सोवियत युद्ध (1979-1989) के दौरान लोकप्रिय हुआ.

कहा जाता है कि जब अफगान मुजाहिदीन लड़ाकों ने इस राइफल को सोवियत सैनिकों से छीन लिया, तो उन्होंने इसे “Krinkov” कहना शुरू किया. एक अन्य मत के अनुसार, यह नाम अमेरिकी खुफिया एजेंटों या हथियार संग्रहकर्ताओं ने गलती से दे दिया, जो बाद में आम प्रचलन में आ गया. आज यह राइफल दुनिया भर में AK Krinkov के नाम से प्रसिद्ध है, खासकर अमेरिका में, जहां यह कलेक्टरों की पसंदीदा बन चुकी है.

क्यों खास है AK Krinkov?

AK Krinkov को खास बनाते हैं इसके तीन प्रमुख गुण:

  • कॉम्पैक्ट आकार: छोटी बैरल होने के बावजूद इसकी फायर पावर किसी AK-74 से कम नहीं.
  • उच्च गतिशीलता: वाहनों और संकरी जगहों में ऑपरेशन के लिए आदर्श.
  • विश्वसनीयता: कठिन परिस्थितियों में भी बिना जाम हुए लगातार फायर कर सकती है.

यही वजह है कि यह हथियार स्पेशल ऑपरेशन यूनिट्स, पैरामिलिट्री ग्रुप्स, और अंडरग्राउंड आतंकी संगठनों की पसंदीदा राइफल रही है.

दिल्ली ब्लास्ट केस से कनेक्शन की जांच

जांच एजेंसियों का मानना है कि फरीदाबाद से मिली यह बरामदगी दिल्ली लाल किला ब्लास्ट से जुड़ी हो सकती है. डॉक्टर मुजम्मिल का नाम फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल में सामने आया है, और शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट और डेटोनेटर का इस्तेमाल हुआ.

एजेंसियों को शक है कि बरामद रसायन और हथियार एक ही नेटवर्क द्वारा तैयार या भेजे गए थे. इसी वजह से गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है.

सुरक्षा एजेंसियों में बढ़ी सतर्कता

फरीदाबाद बरामदगी के बाद दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सभी संवेदनशील स्थानों, मेट्रो स्टेशन, हवाई अड्डे, बस टर्मिनल और राजकीय इमारतों पर बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की तैनाती की गई है. गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह बरामदगी सिर्फ एक आतंकी योजना नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की झलक है, जो शहरी क्षेत्रों में विस्फोटक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था.

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