फिर जलने लगा फ्रांस... सड़कों पर उतरे 4 लाख प्रदर्शनकारी, पुलिस के साथ हुई झड़प, हिली मैक्रों सरकार?

फ्रांस में महंगाई और शिक्षा के लिए कम बजट के विरोध में देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. शनिवार को करीब 4 लाख 10 हजार लोग सड़कों पर उतरे.

400000 protesters take to the streets in France once again clashes erupt
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

France Protests: फ्रांस में महंगाई और शिक्षा के लिए कम बजट के विरोध में देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. शनिवार को करीब 4 लाख 10 हजार लोग सड़कों पर उतरे. इस दौरान कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, राजधानी पेरिस में ही करीब 1 लाख 10 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया. इन घटनाओं के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव बढ़ रहा है.

यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब एक हफ्ते पहले ही फ्रांस के कई शहरों में हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं. गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने कहा कि काले कपड़े पहने कुछ समूहों के साथ पुलिस की गंभीर झड़पें हुईं. सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए देशभर में करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था.

मैक्रों सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

फ्रांस में मई 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं. ऐसे में लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. सरकार ने पुलिस को निर्देश दिया है कि प्रदर्शनकारियों को शहरों के मुख्य इलाकों और दुकानों व कारोबार वाले क्षेत्रों से दूर रखा जाए. हिंसा पर काबू पाने के लिए पेरिस समेत कई शहरों के कुछ इलाकों में सीमित समय के लिए कर्फ्यू भी लगाया गया है.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, मैक्रों ने अधिकारियों से उन प्रदर्शनों को रोकने के लिए कहा है, जो ट्रेड यूनियनों से जुड़े नहीं हैं. उन्होंने ऐसे प्रदर्शनों को अवैध बताया है.

आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल

शनिवार को पेरिस में प्रदर्शनकारियों की भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. प्रदर्शन के दौरान कई लोग ट्रेड यूनियनों के बैनर लेकर पहुंचे. वहीं, कुछ पोस्टरों पर मैक्रों सरकार और पुलिस के खिलाफ नारे लिखे थे.

समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक, गृह मंत्री नुनेज ने कहा कि लोगों को अपनी बात रखने की आजादी दी गई, लेकिन कुछ लोगों ने प्रदर्शन को हिंसक बनाने की कोशिश की.

दूसरी तरफ, छात्र संगठनों और मजदूर यूनियनों ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है. उनकी मांग है कि सरकार प्रस्तावित बजट से जुड़े फैसलों को वापस ले और शिक्षा समेत जरूरी सार्वजनिक सेवाओं के लिए ज्यादा पैसा खर्च करे.

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