Chaitra Purnima: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है. इस दिन व्रत, स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. लेकिन इस बार चैत्र पूर्णिमा की तिथि 1 अप्रैल और 2 अप्रैल दोनों दिन पड़ रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि व्रत किस दिन रखा जाए और स्नान-दान कब किया जाए.
पंचांग के नियमों के अनुसार, जिस दिन पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय होता है, उस दिन स्नान और दान किया जाता है. वहीं, जिस दिन पूर्णिमा तिथि में चंद्रोदय होता है, उस दिन व्रत रखा जाता है. आइए विस्तार से समझते हैं-
चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है. माता लक्ष्मी की पूजा से धन-समृद्धि बढ़ती है और चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शक्ति मजबूत होती है. इस दिन स्नान-दान और पितरों का तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
चैत्र पूर्णिमा की तिथि कब से कब तक है?
पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल, बुधवार को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू हो रही है और 2 अप्रैल, गुरुवार को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी.
चैत्र पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय का समय
1 अप्रैल को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा, उस समय पूर्णिमा तिथि शुरू नहीं हुई होगी.
2 अप्रैल को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर होगा और उस समय पूर्णिमा तिथि रहेगी.
चैत्र पूर्णिमा 2026 स्नान-दान की तारीख
उदयातिथि के अनुसार चैत्र पूर्णिमा का स्नान और दान 2 अप्रैल, गुरुवार को किया जाएगा. इसलिए चैत्र पूर्णिमा का मुख्य पर्व 2 अप्रैल को माना जाएगा.
चैत्र पूर्णिमा तिथि में चंद्रोदय का समय
चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 तारीख
चूंकि 1 अप्रैल को चंद्रोदय पूर्णिमा तिथि में हो रहा है, इसलिए चैत्र पूर्णिमा का व्रत 1 अप्रैल को रखना उचित रहेगा. इस दिन रात में चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य दिया जाता है.
चैत्र पूर्णिमा 2026 मुहूर्त
2 अप्रैल को स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 38 मिनट से 5 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक है.
1 अप्रैल को व्रत के दिन सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक भगवान सत्यनारायण की पूजा का शुभ समय है. शाम 6 बजकर 39 मिनट के बाद प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी. इसके बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा.
4 शुभ योग में चैत्र पूर्णिमा व्रत
1 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा व्रत के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं. रवि योग सुबह 6 बजकर 11 मिनट से शाम 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 4 बजकर 17 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. वृद्धि योग दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, इसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा.
चैत्र पूर्णिमा का महत्व
चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. माता लक्ष्मी की कृपा से धन की वृद्धि होती है और दरिद्रता दूर होती है. रात में चंद्रमा की पूजा करने से मानसिक शक्ति मजबूत होती है और चंद्र दोष दूर होता है.
इस दिन स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य मिलता है. स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण करना भी शुभ माना जाता है, जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.
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