Dhanteras 2026: दीपावली की रौनक धनतेरस के साथ ही शुरू हो जाती है. इस दिन बाजारों में सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर खरीदी गई चीजें घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती हैं. यह पर्व सिर्फ धन और वैभव की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र से भी जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसलिए धनतेरस को धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं साल 2026 में धनतेरस कब मनाई जाएगी, पूजा का शुभ समय क्या है और इस दिन किन देवी-देवताओं की आराधना की जाती है.
धनतेरस पर क्यों की जाती है भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा?
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. उन्हें आयुर्वेद का जनक माना जाता है. इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी शरीर और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है.
धनतेरस पर भगवान कुबेर की आराधना भी की जाती है. धार्मिक मान्यताओं में कुबेर देव को देवताओं का कोषाध्यक्ष और धन-संपत्ति का रक्षक बताया गया है. घर और कारोबार में आर्थिक स्थिरता, तरक्की और समृद्धि की कामना से मां लक्ष्मी के साथ कुबेर देव की पूजा की जाती है. वहीं, मां लक्ष्मी को सुख, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं. यही वजह है कि धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है.
धनतेरस 2026 पर ग्रहों की कैसी रहेगी स्थिति?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में धनतेरस शुक्रवार को पड़ रही है. शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी और सुख-सुविधाओं के कारक ग्रह शुक्र को समर्पित माना जाता है. इस वजह से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.
पंचांग के अनुसार, धनतेरस पर द्वादशी तिथि सुबह 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी. इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी. इस दिन हस्त नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसे ज्योतिष में धन वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. विष्कुम्भ योग की शुरुआती घटी को सामान्य कार्यों के लिए मध्यम माना गया है, हालांकि इसके बाद परिस्थितियां अनुकूल होती जाती हैं.
ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सूर्य तुला राशि में, चंद्रमा कन्या राशि में, मंगल कर्क राशि में, बुध तुला राशि में और गुरु सिंह राशि में रहेंगे. इसके अलावा शुक्र कन्या, शनि मीन, राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में संचरण करेंगे.
धनतेरस पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना जाता है. साल 2026 में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर, शुक्रवार को सुबह 11 बजकर 06 मिनट से शुरू होगी और 7 नवंबर, शनिवार को सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगी.
हस्त नक्षत्र 6 नवंबर को सुबह 5 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. वहीं, 6 नवंबर को शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजे तक प्रदोष काल रहेगा. इसी दौरान धनतेरस की पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त बताया गया है.
वृषभ लग्न को भी पूजा के लिए शुभ माना गया है. यह 6 नवंबर को शाम 5 बजकर 45 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. ऐसे में श्रद्धालु प्रदोष काल और स्थिर लग्न को ध्यान में रखकर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा कर सकते हैं.
धनतेरस की पूजा में प्रदोष काल और स्थिर लग्न का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की पूजा संध्या के समय यानी प्रदोष काल में करना विशेष फलदायी माना जाता है. इस दौरान भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं. इसके साथ ही वृषभ लग्न यानी स्थिर लग्न को भी पूजा के लिए शुभ माना गया है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, स्थिर लग्न में की गई पूजा से घर में धन-संपत्ति और समृद्धि का स्थायी वास होता है. हालांकि, पूजा करते समय अपनी स्थानीय पंचांग गणना का भी ध्यान रखना चाहिए.
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