Cyclone Arnab: आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान अर्नब के दस्तक देने के बाद हालात गंभीर हो गए हैं. तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और समुद्र में उठती ऊंची लहरों ने तटीय जिलों में जनजीवन को प्रभावित किया है. कई जगहों पर पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने और निचले इलाकों में पानी भरने की खबरें सामने आई हैं. तूफान का असर ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी देखने को मिला है, जहां तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी है.
#WATCH | Andhra Pradesh: Very strong winds and heavy rainfall in Amalapuram in Konaseema district as an impact of Cyclone Arnab. (Video Source: Andhra Pradesh I&PR) https://t.co/E1jMR5asRd
— ANI (@ANI) October 27, 2026
आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में तूफान का असर
चक्रवात के प्रभाव से विशाखापट्टनम समेत आंध्र प्रदेश के कई तटीय इलाकों में मौसम ने विकराल रूप ले लिया. समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं. विशाखापट्टनम के आरके बीच पर भी समुद्र की उग्र स्थिति देखने को मिली. कई इलाकों में पेड़ गिरने से रास्ते बाधित हुए, जबकि कुछ स्थानों पर घरों की छतों और दीवारों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है. अनकापल्ली, काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका के बीच सतर्कता जरूरी है. लगातार बारिश के कारण सड़कों पर पानी जमा होने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है.
कब और कहां हुआ लैंडफॉल?
दिए गए विवरण के मुताबिक, चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 की तड़के आंध्र प्रदेश के तट के पास लैंडफॉल की प्रक्रिया शुरू की. इसमें लैंडफॉल का समय रात करीब 1:20 बजे बताया गया है. तूफान का प्रभाव काकीनाडा के आसपास, यनम के दक्षिण और बापटला से विशाखापट्टनम के बीच के तटीय क्षेत्र में पड़ने का दावा किया गया है.लैंडफॉल के दौरान चक्रवात की निरंतर हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की बात कही गई है. हालांकि, इन आंकड़ों और वास्तविक लैंडफॉल की स्थिति की पुष्टि के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक बुलेटिन को देखना आवश्यक है.
समुद्री लहरों और बारिश से बढ़ा खतरा
चक्रवात के दौरान समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तटीय इलाकों में समुद्री पानी घुसने का खतरा बढ़ जाता है. दिए गए विवरण में स्टॉर्म सर्ज की ऊंचाई 1.5 से 2.5 मीटर तक रहने और गोदावरी नदी के मुहाने के आसपास इसके 3.5 मीटर तक पहुंचने की आशंका जताई गई है. ऐसी स्थिति में निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ सकता है. भारी बारिश से सड़कें जलमग्न हो सकती हैं, बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हो सकता है. प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना और समुद्र तटों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहना ऐसे हालात में बेहद महत्वपूर्ण है.
Massive - sea enters North Chennai; throws off commute and crashes into commuters. https://t.co/9SnCQdhaRC
— Omjasvin M D (@omjasvinMD) October 27, 2026
ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी असर
चक्रवात से जुड़े मौसम तंत्र के प्रभाव के चलते ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी तेज हवाओं और बारिश की स्थिति बनने की जानकारी दी गई है. लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर यातायात संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. प्रभावित क्षेत्रों में मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखना और स्थानीय प्रशासन की सलाह के अनुसार कदम उठाना जरूरी है.
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