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आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी बेहद पुण्यदायी मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और कथा सुनने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं.


योगिनी एकादशी की कथा अलकापुरी के राजा कुबेर के माली हेममाली से जुड़ी है, जिसने अपने कर्तव्य में लापरवाही की थी.


भगवान शिव की पूजा के लिए समय पर फूल न पहुंचाने पर कुबेर ने हेममाली को श्राप दिया, जिससे उसे कोढ़ हो गया.


जंगल में भटकते हुए हेममाली की मुलाकात महर्षि मार्कण्डेय से हुई. उन्होंने योगिनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी.


हेममाली ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा से योगिनी एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना का.


व्रत के प्रभाव से उसका श्राप समाप्त हो गया, वह पहले जैसा स्वस्थ हो गया और पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा.


मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत और कथा सुनने से पापों का नाश, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है.


अगर आप भी योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो श्रद्धा से यह कथा जरूर पढ़ें या सुनें. ऐसा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है.

