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Makar Sankranti हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में शुमार मकर संक्रांति को साल का पहला पर्व माना जाता है.


इस त्योहार को पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है.


हिंदू मान्यता के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होने के बाद ताप में इजाफा होता है, जिसके कारण गर्मी भी बढ़ती.


हिंदू धर्म में भी मान्यता है कि ठंड की विदाई इसी दिन से शुरू होती है और इसके साथ ही खरमास का महीना भी खत्म हो जाता है.


मकर संक्रांति त्योहार को लेकर प्रत्येक वर्ष यह दुविधा रहती है कि यह 14 जनवरी को मनाया जाएगा या फिर 15 जनवरी को.


15 जनवरी को सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर भास्कर यानी सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहा है.


ऐसे में इस बार 15 जनवरी को देशभर में मकर संक्रांति मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, 16 घटी और अधिकतम 40 घटी तक पुण्य काल माना जाता है.


ऐसे में 15 जनवरी को मकर संक्रांति माना शुभ माना जाएगा. इस बार यानी 15 जनवरी को सूर्य सुबह 2 बजकर 54 मिनट से धनु राशि से मकर में जाएंगे.


मकर संक्रांति वाले दिन स्नान का पुण्यकाल 15 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शाम 6 बजकर 21 तक रहेगा.


विशेषज्ञों के अनुसार, एक वर्ष में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं, लेकिन मकर संक्रांति सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.


पौष महीने में जब सूर्य उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इस दौरान उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों में पर्व के रूप में मनाया जाता है.


इस दिन दान-पुण्य भी किया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा होती है उन्हें अर्ध्य भी दिया जाता है. इस दिन नहाने को शुभ माना जाता है.


दिल्ली की यह महिला कोई आम नागरिक नहीं थी, उस वक्त की तत्कालीन PM इंदिरा गांधी ने खुद इन्हें भारत बुलाया था.
