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सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान विधि-विधान से किया गया जलाभिषेक विशेष फलदायी माना जाता है.


जलाभिषेक से पहले सुबह स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और पूरे श्रद्धा भाव से पूजा का संकल्प लें. शुद्ध मन और विश्वास सबसे जरूरी माने जाते हैं.


शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं. इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार पंचामृत या अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.


बेलपत्र, सफेद फूल, चंदन, धतूरा और भस्म भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं. पूजा में इन्हें श्रद्धा के साथ अर्पित करें.


जलाभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. माना जाता है कि इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है.


पूजा के दौरान शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर या तुलसी के पत्ते चढ़ाने से बचें. शिव पूजा में इनका उपयोग नहीं किया जाता.


पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव की आरती करें, प्रसाद अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि व मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें.


मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया जलाभिषेक भगवान भोलेनाथ को शीघ्र प्रसन्न करता है और जीवन में सुख, शांति व सफलता का आशीर्वाद देता है.


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