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जिसके रौद्र रूप से देवता भी कांप उठे.जानिए मां चामुंडा की रहस्यमयी कथा.


मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, मां चामुंडा देवी दुर्गा के क्रोध से प्रकट हुईं.उनका अवतार अधर्म और दुष्ट शक्तियों के संहार के लिए हुआ था.


जब चंड और मुंड नाम के असुरों ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया, तब देवताओं ने मां दुर्गा से रक्षा की प्रार्थना की.


युद्ध के दौरान देवी दुर्गा के मस्तक से एक अग्निज्वाला निकली, जिससे मां चामुंडा का प्राकट हुआ.


मां चामुंडा ने कुछ ही क्षणों में चंड और मुंड का वध कर दिया. इसी विजय के बाद उन्हें 'चामुंडा' नाम प्राप्त हुआ.


मां चामुंडा का स्वरूप अत्यंत उग्र माना जाता है. गले में मुंडमाला, हाथों में त्रिशूल, खड्ग और खप्पर उनके शक्ति स्वरूप का प्रतीक हैं.


तांत्रिक परंपरा में मां चामुंडा का विशेष महत्व है. श्मशान, राख और अग्नि उनके उपासना के प्रमुख प्रतीक माने जाते हैं.


मां चामुंडा केवल विनाश की नहीं, बल्कि अधर्म के अंत, भय से मुक्ति और धर्म की रक्षा की भी देवी मानी जाती हैं.

