रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक यूक्रेनी सैनिक की दर्दनाक कहानी सामने आई है. जान बचाने के लिए इस सैनिक ने खुद ही अपना पैर काट दिया और करीब आठ महीने तक एक बॉयलर हाउस में फंसा रहा. आखिरकार 4 अक्टूबर को उसे ड्रोन की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया. यूक्रेनी सेना के मुताबिक, किसी सैनिक को ड्रोन से हवा में उठाकर बचाने का यह पहला ज्ञात मामला है.
सैनिक का नाम व्लासेंको है. फिलहाल खार्किव के एक अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में उसने बताया कि एक समय उसे लगने लगा था कि अब वह जिंदा नहीं बच पाएगा. उसने कहा, “मैंने खुद को पहले ही दफना दिया था. मुझे पता था कि अब कोई उम्मीद नहीं बची है.”
रूसी ड्रोन हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ सैनिक
व्लासेंको को पिछले साल मई में अपने साथी बास्की के साथ मोर्चे पर भेजा गया था. दोनों एक छोटे से गड्ढे में छिपकर तैनात थे. उन्हें ड्रोन के जरिए जरूरी सामान पहुंचाया जाता था. बाद में उनकी जगह लेने के लिए दो सैनिक भेजे गए, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.
फरवरी के मध्य में उनका ठिकाना पानी से भर गया. ऐसे में दोनों को एक तबाह स्कूल में शरण लेनी पड़ी. लेकिन यहां भी वे सुरक्षित नहीं रह सके. एक रूसी ड्रोन ने उन पर बम गिरा दिया, जिसमें बास्की की मौत हो गई और व्लासेंको गंभीर रूप से घायल हो गया.
हमले में व्लासेंको का बायां पैर बुरी तरह जख्मी हो गया था. उसका दूसरा पैर भी गंभीर रूप से घायल था. हालत ऐसी थी कि उसके लिए हिलना-डुलना भी मुश्किल हो गया था.
तीन महीने बाद खुद काटना पड़ा अपना पैर
हमले के बाद व्लासेंको ने पास के एक बॉयलर हाउस में शरण ली. वहां उसे पता चला कि उसके दाहिने पैर का निचला हिस्सा भी बुरी तरह खराब हो चुका है और हड्डी बाहर निकल आई है. उसे समझ आ गया कि जान बचाने के लिए पैर काटना पड़ेगा.
करीब तीन महीने तक दर्द और मुश्किलों से जूझने के बाद उसने खुद ही चाकू से अपना पैर काट दिया. इसके बाद खून रोकने के लिए पैर पर कसकर पट्टी बांध ली. इसके बावजूद वह बॉयलर हाउस से बाहर नहीं निकल सका और वहीं फंसा रहा.
जमीन पर मौजूद वाहनों से बचाना था मुश्किल
व्लासेंको को बचाने वाले अभियान के अधिकारी ने बताया कि रूसी ड्रोन के लगातार हमलों के कारण घायल सैनिकों को पिकअप ट्रक या बख्तरबंद गाड़ियों से निकालना बेहद मुश्किल था.
सेना ने व्लासेंको तक पहुंचने के लिए मानवरहित जमीनी वाहनों का इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन रूसी ड्रोन ने उन्हें नष्ट कर दिया. इसके बाद अधिकारियों को एक ऐसे बड़े ड्रोन के बारे में पता चला, जो 90 किलोग्राम तक वजन उठा सकता था और करीब 25 किलोमीटर तक उड़ सकता था.
छह रोटर वाले ड्रोन से किया गया रेस्क्यू
आखिरकार 4 अक्टूबर को छह रोटर वाला एक बड़ा ड्रोन व्लासेंको तक पहुंचा. उसने ड्रोन से लटके एक खास हुक से खुद को जोड़ा और हवा में उठ गया. ड्रोन उसे करीब 70 मीटर की ऊंचाई तक ले गया.
इस अभियान में तीन छोटे ड्रोन भी साथ उड़ रहे थे. उनका काम रूसी हमलावर ड्रोनों का ध्यान भटकाना था, ताकि व्लासेंको को सुरक्षित निकाला जा सके.
करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद ड्रोन तय जगह पर पहुंचा. वहां से व्लासेंको को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है. आठ महीने तक युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने और गंभीर चोटों के बावजूद उसका बचाया जाना यूक्रेनी सेना के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है.