Navratri 2026: शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होने जा रहा है. इस दौरान देशभर में मां दुर्गा के भक्त पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए माता रानी की आराधना करेंगे. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि सच्चे मन से माता की उपासना और व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है.
नवरात्रि में पूजा-पाठ के साथ खानपान के नियमों का भी विशेष महत्व माना जाता है. कई भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और आखिरी दिन उपवास करते हैं. ऐसे में व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए, इसकी जानकारी होना जरूरी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत में सात्विक भोजन करने और नियमों का पालन करने से पूजा की पवित्रता बनी रहती है. आइए जानते हैं नवरात्रि व्रत के दौरान क्या खाएं, क्या नहीं और किन जरूरी बातों का ध्यान रखें.
नवरात्रि व्रत में किन चीजों को खाने से बचें?
शारदीय नवरात्रि में व्रत रखने वाले भक्तों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. व्रत की परंपराओं के अनुसार, इस दौरान गेहूं, चावल और सामान्य अनाज के साथ दालों का सेवन नहीं किया जाता. हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है.
इसके अलावा प्याज, लहसुन, अंडा, मांस-मछली और शराब से परहेज किया जाता है. कुछ परंपराओं में बैंगन, भिंडी, कटहल और मशरूम जैसी सब्जियां भी व्रत के दौरान नहीं खाई जाती हैं. इसलिए उपवास रखने से पहले अपने परिवार की धार्मिक परंपराओं के अनुसार खानपान का नियम तय कर लेना चाहिए.
व्रत में क्या खाएं?
नवरात्रि व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा देने के लिए फलाहार और सात्विक भोजन का सेवन किया जा सकता है. व्रत में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी रोटी, पूरी या पकौड़े खाए जाते हैं. इसके अलावा समा के चावल, साबूदाने की खिचड़ी और आलू जैसे खाद्य पदार्थ भी कई घरों में फलाहार के रूप में खाए जाते हैं.
फलों में केला, सेब, पपीता और अनार जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं. वहीं, दूध, दही, पनीर, छाछ और लस्सी का सेवन भी किया जा सकता है. व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करने की परंपरा है. ध्यान रखें कि भोजन हल्का और संतुलित हो, ताकि दिनभर काम करने में परेशानी न हो.
नवरात्रि व्रत में नमक से लेकर अनाज तक के नियम
व्रत के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जाता है. आमतौर पर फलाहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि साधारण नमक से परहेज किया जाता है. इसी तरह सामान्य आटे की जगह कुट्टू या सिंघाड़े का आटा इस्तेमाल किया जाता है.
हालांकि, व्रत के नियम हर जगह एक जैसे नहीं होते. कुछ भक्त नौ दिनों तक अनाज का सेवन नहीं करते, जबकि कुछ लोग अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग नियम अपनाते हैं. इसलिए व्रत शुरू करने से पहले यह जान लेना बेहतर है कि आपके घर में किन चीजों को खाने की अनुमति है.
नवरात्रि में भूलकर भी न करें ये काम
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ और खानपान के साथ कुछ धार्मिक मान्यताओं का भी पालन किया जाता है. मान्यता के अनुसार, व्रत रखने वाले भक्तों को नौ दिनों तक बाल, दाढ़ी-मूंछ और नाखून काटने से बचना चाहिए. हालांकि, यह परंपरा सभी परिवारों में समान रूप से प्रचलित नहीं है.
पूजा के समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए और पूजा स्थल पर चमड़े से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल करने से परहेज किया जाता है. यदि घर में कलश स्थापना की गई है या अखंड ज्योति जलाई गई है, तो उसकी नियमित देखभाल जरूरी है. ऐसी मान्यता है कि अखंड ज्योति जलाने वाले घर में किसी जिम्मेदार व्यक्ति का मौजूद रहना चाहिए, ताकि दीपक की लौ सुरक्षित बनी रहे.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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