PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया. इस अवसर पर उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, युवाओं की भूमिका और शिक्षा व्यवस्था में बदलावों पर अपने विचार रखे. पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवाओं को सशक्त बनाना उनके प्रयासों और नीतियों का प्रमुख केंद्र है. उन्होंने चिन्मय मिशन की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की.
Delighted to join the Chinmaya Amrit Mahotsav Global Sammelan. The Chinmaya Mission has spent decades serving communities and sharing India's spiritual wisdom with the world. https://t.co/gvALnWbo91
— Narendra Modi (@narendramodi) October 23, 2026
युवाओं की भागीदारी पर पीएम मोदी ने जताई खुशी
चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इस आयोजन में युवाओं ने बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं की ऊर्जा और भागीदारी देश के भविष्य को दिशा देने में अहम भूमिका निभाती है. उनके मुताबिक, युवाओं को अवसर देना और उनकी क्षमता का विकास करना देश की प्रगति के लिए जरूरी है.
भारत की पहचान ज्ञान और प्रकाश की खोज से जुड़ी
प्रधानमंत्री ने भारतीय सभ्यता और ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का ज्ञान और बोध अमर है. इसी ज्ञान परंपरा के कारण देश हजारों वर्षों से अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है. उन्होंने कहा कि भारत शब्द का अर्थ भी ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान से जुड़ा हुआ है. पीएम मोदी के मुताबिक, भारतीय परंपरा की यही विशेषता देश को अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
आजादी के 75 साल को प्रेरणा का अवसर बनाने पर दिया जोर
पीएम मोदी ने कहा कि जब देश ने आजादी के 75 वर्ष पूरे किए, तब उनके मन में इस अवसर को भारत के लिए प्रेरणा का मंच बनाने का विचार आया. उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारत के उस स्वरूप को जीवंत करना था, जो अमृत विचारों को अपने जीवन में उतारना जानता है. उन्होंने भारतीय मूल्यों और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
शिक्षा में आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कारों पर जोर
प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के शैक्षणिक योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि इसके 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों के भविष्य निर्माण में भूमिका निभा रहे हैं. इन संस्थानों में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कारों से भी परिचित कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में बेहतर सोच और जीवन मूल्यों का विकास करना भी है.
नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा को महत्व
पीएम मोदी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को नए भारत की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई गई है. इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में पढ़ाई, आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक को महत्व दिया गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है.
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