Nepal Flood: नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने गोरखा जिले के कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बाढ़ के तेज बहाव में तीन पुल बह गए, जबकि कई घरों में पानी घुसने से लोगों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. कुछ इलाकों में भूस्खलन और मलबे के कारण नदी का रास्ता भी प्रभावित हुआ है. हालात को देखते हुए नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है. राहत और बचाव से जुड़ी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद करने में जुटी हैं.
#WATCH | Nepal's National Disaster Risk Reduction & Management Authority releases aerial pictures of flood-affected areas in Gorkha. (Source: NDRRMA) https://t.co/QPe6slfD69
— ANI (@ANI) October 11, 2026
बूढ़ी गंडकी में बाढ़ से कई इलाकों में नुकसान
नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर 6 की ओर से बाढ़ का तेज बहाव आ रहा है. प्रशासन ने लोगों को त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे जाने से बचने और ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी दी है. अधिकारियों ने लोगों से बाढ़ का पानी कम होने तक सावधानी बरतने की अपील की है.
नेपाल पुलिस के मुताबिक, चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच पहाड़ से मिट्टी और पत्थर गिरने के कारण नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया था. इसके बाद अचानक आई बाढ़ से आसपास के क्षेत्रों में नुकसान हुआ. कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है.
बाढ़ में तीन पुल बहे, कई घरों पर खतरा
बाढ़ के तेज बहाव के कारण गोरखा जिले में तीन पुल बह गए. चुमनुब्री-3 में न्याकचेत और सिर्दिबास को जोड़ने वाला पुराना सस्पेंशन ब्रिज बह गया. वहीं, धार्चे-5 में माछाखोला और केरौजा के बीच बना दूसरा सस्पेंशन ब्रिज भी बाढ़ की चपेट में आ गया. आरुघाट के वार्ड नंबर 2 और 3 को जोड़ने वाला सोती का लोहे का पुल भी बह गया.
बाढ़ का पानी माछाखोला की निचली बस्ती में घुसने से पांच से सात घर प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा धार्चे-3 के सल्लेरी इलाके में करीब 20 से 22 घरों पर खतरा मंडरा रहा है. प्रशासन और राहत दल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं. स्थानीय लोगों को नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी गई है.
अगस्त में आई बाढ़ से नेपाल को भारी नुकसान
नेपाल पहले भी इस साल विनाशकारी बाढ़ का सामना कर चुका है. दी गई जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था. उस आपदा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत और 6,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने का दावा किया गया था. हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, उस बाढ़ से नेपाल को लगभग 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ था. रिपोर्ट में बताया गया कि कुल नुकसान का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचे से जुड़ा था. बाढ़ और भूस्खलन के कारण बिजली परियोजनाओं, सड़कों और पुलों को भी नुकसान पहुंचा था.
बिजली परियोजनाओं और सड़कों पर भी पड़ा असर
अगस्त की बाढ़ के दौरान नेपाल में कई बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई थीं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 281 मेगावाट की कुल क्षमता वाली आठ चालू बिजली परियोजनाओं और 388 मेगावाट क्षमता वाली चार निर्माणाधीन परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा था. इसके अलावा गल्छी-बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क और पृथ्वी हाईवे के कुछ हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए थे. बाढ़ के कारण 48 झूला पुल और वाहनों की आवाजाही के लिए बने 31 पुल भी प्रभावित हुए थे. इस तरह की आपदाएं नेपाल के पर्वतीय इलाकों में परिवहन, बिजली आपूर्ति और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर गंभीर असर डालती हैं.
बाढ़ के बाद भारत और चीन की मदद का जिक्र
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यावरणीय खतरों का मुद्दा उठाया था. उन्होंने अगस्त की बाढ़ के बाद सहायता देने के लिए भारत और चीन का आभार जताया था. शाह ने अपने संबोधन में कहा था कि बढ़ते तापमान के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जमी जमीन और बर्फ प्रभावित हो रही है. इससे पहाड़ों के अस्थिर होने, चट्टानें गिरने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है. हिमालयी क्षेत्रों में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती हैं.
ये भी पढ़ें- सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर जोरदार धमाका, कई लोग घायल; एयरलाइंस ने रद्द कीं फ्लाइट्स