दुनिया के पांच देशों में लोगों को आपातकालीन हालात से निपटने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है. ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, जर्मनी और नॉर्वे ने अलग-अलग खतरों को देखते हुए लोगों से जरूरी सामान अपने पास रखने और सतर्क रहने को कहा है. इन तैयारियों में प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों, युद्ध और जरूरी सेवाओं के बंद होने जैसी स्थितियां शामिल हैं.
ब्रिटेन में लोगों से तीन दिन का जरूरी सामान रखने को कहा गया है, जबकि जापान में तीन से पांच दिन और जरूरत पड़ने पर एक सप्ताह तक के लिए तैयारी करने की सलाह दी गई है. सरकारों का कहना है कि किसी बड़े संकट के दौरान अगर बिजली, पानी या सरकारी मदद नहीं मिलती है, तो लोगों के पास जरूरी सामान होना चाहिए.
जापान में भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा
जापान में आपातकालीन तैयारियों पर खास जोर दिया जा रहा है. यहां भूकंप और ज्वालामुखी फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए लोगों से घरों में भोजन, पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें रखने को कहा गया है.
जापान के आपदा प्रबंधन मंत्री गोशी होसोनो के मुताबिक, देश में 2 नवंबर को नई आपदा प्रबंधन एजेंसी शुरू होने जा रही है. सरकार चाहती है कि नागरिक किसी बड़ी आपदा के दौरान कम से कम एक सप्ताह तक खुद अपनी जरूरतें पूरी कर सकें.
जापान को नानकाई ट्रफ में बड़े भूकंप, राजधानी के नीचे भूकंप और माउंट फूजी में ज्वालामुखी फटने जैसी घटनाओं का खतरा रहता है. ऐसे में सरकार आपदा से निपटने की तैयारी मजबूत कर रही है.
ब्रिटेन ने लोगों से तीन दिन का सामान रखने को कहा
ब्रिटेन में सरकार ने 'बी रेडी' अभियान चलाया है. इसके तहत परिवारों को कम से कम तीन दिनों के लिए जरूरी सामान रखने की सलाह दी गई है. इसमें पीने का पानी, डिब्बाबंद खाना, दवाइयां, टॉर्च, रेडियो और कुछ नकदी शामिल हैं.
ब्रिटेन में साइबर हमलों और जरूरी सेवाओं में रुकावट आने को लेकर भी चिंता जताई गई है. इसके अलावा जंगलों में आग, खराब मौसम, दुश्मन देशों से जुड़े खतरे और संगठित अपराध जैसी स्थितियों का भी जिक्र किया गया है.
सरकार का मकसद है कि किसी संकट के समय अगर बिजली या दूसरी जरूरी सेवाएं बंद हो जाएं, तो परिवार कुछ दिनों तक बिना बाहरी मदद के गुजारा कर सकें.
अमेरिका में सैन्य ठिकानों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी
अमेरिका में रक्षा विभाग अपने सैन्य ठिकानों को लंबे समय तक बाहरी सप्लाई के बिना चलाने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत ठिकानों पर बिजली, पानी, ईंधन और संचार जैसी जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
इस योजना का लक्ष्य सैन्य ठिकानों को कम से कम 90 दिनों तक आत्मनिर्भर बनाए रखना है. इसके लिए 'फोर्ट्रेस' (FORTRESS) नाम की योजना का जिक्र किया गया है. अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि युद्ध या किसी बड़े संकट के दौरान बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं का लगातार उपलब्ध रहना बेहद अहम है.
जर्मनी में युवाओं को भेजी जा रही सैन्य सेवा से जुड़ी प्रश्नावली
जर्मनी में युवाओं को सैन्य सेवा से जुड़ी प्रश्नावली भेजी जा रही है. इसके जरिए सेना में सेवा देने को लेकर उनकी रुचि और उपलब्धता की जानकारी जुटाई जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में प्रश्नावली का जवाब नहीं देने पर 250 यूरो तक के जुर्माने का प्रावधान है. इस कदम को देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
नॉर्वे में भी लोगों को तैयार रहने की सलाह
नॉर्वे सरकार ने भी नागरिकों से किसी संकट या युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहने की अपील की है. इसके लिए 'सेल्फ-प्रिपेयर्डनेस वीक' यानी खुद को आपातकाल के लिए तैयार करने का अभियान चलाया जा रहा है.
सरकार लोगों को समझा रही है कि मुश्किल हालात में जरूरी सामान और बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम पहले से होना चाहिए. इसका मकसद यह है कि किसी बड़े संकट के दौरान लोग अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव कम हो.
आखिर इन देशों में क्यों बढ़ रही है तैयारी?
इन पांचों देशों में तैयारियों के पीछे अलग-अलग वजहें हैं. जापान प्राकृतिक आपदाओं से निपटने पर ध्यान दे रहा है, जबकि ब्रिटेन साइबर हमलों, खराब मौसम और दूसरी आपात स्थितियों को लेकर लोगों को जागरूक कर रहा है. अमेरिका सैन्य ठिकानों को आत्मनिर्भर बनाना चाहता है, वहीं जर्मनी और नॉर्वे अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने में जुटे हैं.
इन कदमों का मुख्य उद्देश्य किसी संकट के समय जरूरी सेवाएं बाधित होने पर लोगों को सुरक्षित रखना और उन्हें शुरुआती दिनों में अपनी जरूरतें खुद पूरी करने के लिए तैयार करना है.