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ये जगह अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में हैं.


ये ज्वालामुखी पूरे दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है. इस जगह के आसपास कोई हरियाली या कोई आबादी नहीं है.


इस ज्वालामुखी में पहला विस्फोट सन् 1787 में हुआ था.


साल 1787 में इस ज्वालामुखी से पहली बार लावा निकलता देखा गया था, जिसके बाद अब तक 11 बार ज्वालामुखी का फटना रिकॉर्ड किया जा चुका है.


आखिरी बार ये साल 2016 में ये फटा था और कई महीनो तक लावा निकला था.

