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जिस स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई गई है, विवादित स्थल ठीक उसी स्थान पर है. कोर्ट में यह बयान अहम माना गया था.


14 जनवरी, 1950 को जन्में रामभद्राचार्य की आंखें 2 महीने बाद ही ट्रेकोमा से संक्रमित हो गई थीं और वह नेत्रहीन हो गए.


जन्म से ही नेत्रहीन होने के चलते श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज की पढ़ाई-लिखाई सामान्य स्कूल में नहीं हुई.


देश-दुनिया में भारतीय हिंदू आध्यात्मिक नेता के तौर पर चर्चित रामभद्राचार्य ने 80 किताबें लिखी हैं.


वर्तमान में उत्तर प्रदेश के चित्रकुट में रहते हैं और वह 22 भाषाओं के जानकार हैं.


वह कई विधाओं में काम करते हैं और भारत सरकार ने रामभद्राचार्य को वर्ष 2015 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था.

