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हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, विवाह या पूजा से पहले कलश स्थापना की जाती है. इसे शुभता, समृद्धि और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.


मान्यता है कि कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित सभी देवी-देवताओं और पवित्र नदियों का वास होता है. इसलिए इसे पूजा का सबसे पवित्र अंग माना जाता है.


जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल जीवन, उन्नति, धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं.


धार्मिक मान्यता के अनुसार विधि-विधान से स्थापित कलश वातावरण को शुद्ध करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.


गृह प्रवेश, विवाह, नवरात्रि, हवन, सत्यनारायण कथा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में कलश स्थापना शुभ फल प्राप्ति के लिए की जाती है.


धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कलश सृष्टि, पंचतत्व और जीवन के संतुलन का प्रतीक माना जाता है.


श्रद्धा और नियमपूर्वक कलश स्थापना करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है.


कलश में स्वच्छ जल भरें, आम के पत्ते और नारियल रखें तथा इसे पवित्र स्थान पर स्थापित करें. पूजा समाप्त होने के बाद जल का सम्मानपूर्वक उपयोग या विसर्जन करें.

