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रवि योग के शुभ संयोग में आज भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा शुरू हो रही है. लाखों श्रद्धालु इस दिव्य उत्सव का इंतजार करते हैं.


मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं भक्तों के बीच आते हैं. इस यात्रा में शामिल होने और रथ खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.


इस वर्ष रथ यात्रा रवि योग में शुरू हो रही है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है.


रथ यात्रा के बाद भगवान गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं. वहां कुछ दिनों के विश्राम के बाद बहुदा यात्रा के जरिए पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं. अंत में नीलाद्रि बीजे की रस्म के साथ उत्सव संपन्न होता है.


रथ निर्माण, छेरा पहाड़ा, रथ खींचने की परंपरा और भगवान के विशेष श्रृंगार जैसे अनुष्ठान इस पर्व को और भी भव्य बनाते हैं.


भगवान जगन्नाथ की पूजा करें, मंत्रों का जाप करें, प्रसाद अर्पित करें और जरूरतमंदों को दान दें. श्रद्धा और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है.


जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, समानता और भक्ति का प्रतीक है, जिसमें हर वर्ग के लोग मिलकर भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं.

