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जगन्नाथ रथ यात्रा के नौवें दिन मनाया जाने वाला नीलाद्रि बीजे सिर्फ वापसी का पर्व नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ और मां लक्ष्मी के मिलन का भावुक उत्सव भी है.


मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ बिना मां लक्ष्मी को साथ लिए रथ यात्रा पर निकल जाते हैं. इससे मां लक्ष्मी नाराज होकर मंदिर के द्वार बंद कर देती हैं.


मंदिर में प्रवेश करने से पहले भगवान जगन्नाथ मां लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित करते हैं. इस प्रेमपूर्ण भेंट के बाद मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर मंदिर के द्वार खुलवा देती हैं.


नीलाद्रि बीजे रथ यात्रा का समापन समारोह है. इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने गर्भगृह में वापस विराजमान होते हैं.


ओडिशा में माना जाता है कि नीलाद्रि बीजे पर भगवान द्वारा मां लक्ष्मी को रसगुल्ला अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसी से रसगुल्ले का विशेष धार्मिक महत्व जुड़ा है.


यह परंपरा बताती है कि रिश्तों में रूठना-मनाना स्वाभाविक है. भगवान जगन्नाथ का यह अनुष्ठान प्रेम, सम्मान और क्षमा का संदेश देता है.


नीलाद्रि बीजे के साथ रथ यात्रा का भव्य समापन होता है. भगवान के मंदिर लौटने और रसगुल्ला अर्पित करने की यह रस्म हर साल लाखों श्रद्धालुओं को भावुक कर देती है.

