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माता-पिता की 11 संतानों में से एक ओशो का असली नाम चंद्र मोहन जैन था. वह 7 वर्ष की उम्र तक ननिहाल में रहे.


ओशो की मृत्यु 19 जनवरी, 1990 को सिर्फ 58 वर्ष की आयु में रहस्यमय हालात में हुई.


वर्ष 1981 से 1985 के बीच तो अमेरिका चले गए थे. अमेरिकी प्रांत ओरेगॉन में उन्होंने आश्रम की स्थापना की.


भारत लौटने के बाद वे पुणे के कोरेगांव पार्क इलाके में अपने आश्रम में लौट आए.


कहा जाता है कि अमेरिकी जेलों में कथित जहर देने के बाद शरीर में रहना नरक बन गया था, इसलिए उनकी जान गई.


ओशो की समाधि पर लिखा गया है 'न कभी जन्मा, न कभी मरा, सिर्फ 11 दिसंबर 1931 से 19 जनवरी 1990 के बीच इस पृथ्वी ग्रह पर भ्रमण किया.


मौत से पूर्व उनके अंतिम शब्द हैं: 'याद रखें कि आप एक बुद्ध हैं-सम्मासति'

